आत्मविश्वास जगाकर ही बनेगा विश्वास और शांति से परिपूर्ण समाज

जीवन समस्याओं और संघर्षों का केंद्र है। मनुष्य के जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं, परिस्थितियाँ बदलती हैं और अनेक बार चुनौतियाँ उसके धैर्य की परीक्षा लेती हैं। ऐसे समय में वही व्यक्ति आगे बढ़ पाता है,

Abhinav Shukla Picture
Published On

जीवन समस्याओं और संघर्षों का केंद्र है। मनुष्य के जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं, परिस्थितियाँ बदलती हैं और अनेक बार चुनौतियाँ उसके धैर्य की परीक्षा लेती हैं। ऐसे समय में वही व्यक्ति आगे बढ़ पाता है, जिसके भीतर आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और संघर्ष करने का साहस होता है। डार्विन ने भी संघर्ष के महत्व को रेखांकित किया था। आज भौतिकवादी युग में मनुष्य की आवश्यकताएँ बढ़ी हैं और उनके साथ समस्याओं का दायरा भी विस्तृत हुआ है। विकसित और विकासशील सभी देशों को किसी न किसी रूप में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में भाषा, जाति, धर्म और संप्रदाय से जुड़ी समस्याओं के साथ प्राकृतिक कठिनाइयाँ भी सामने आती हैं। कहीं बाढ़ जनजीवन को प्रभावित करती है तो कहीं सूखा लोगों की परेशानियाँ बढ़ा देता है। इन परिस्थितियों में आत्मविश्वास और परस्पर सहयोग ही समाज को मजबूती प्रदान कर सकते हैं।
 
भारत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में अनेक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। पहले के भारत और आज के भारत में बहुत अंतर आया है। देश में अनेक राजनीतिक दल हैं और प्रत्येक दल जनता के कल्याण की बात करता है। लेकिन जब कथनी और करनी में अंतर आ जाता है, तब लोगों का विश्वास कमजोर होने लगता है। व्यक्तिगत स्वार्थ और दलगत हितों को प्राथमिकता देने से सामाजिक एकता प्रभावित होती है। शांति की
स्थापना के लिए चर्चाएँ और बैठकें होती हैं, फिर भी दुनिया में अविश्वास और संघर्ष की स्थितियाँ बनी रहती हैं। भाई को भाई पर, पड़ोसी को पड़ोसी पर और एक राष्ट्र को दूसरे राष्ट्र पर संदेह होने लगे तो शांति का मार्ग कठिन हो जाता है। शांति हमारा लक्ष्य है, लेकिन यदि हमारे साधन अशांति उत्पन्न करने वाले हों तो लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता। हिंसा, आतंक और बल प्रयोग किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हैं। दूसरों को पीड़ा देने वाला व्यक्ति यह भूल जाता है कि उसके कर्मों के दुष्परिणाम अंततः उसके जीवन को भी प्रभावित कर सकते हैं।
 
मनुष्य को अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर सार्वजनीन हित के बारे में भी विचार करना चाहिए। गाँव के किसी एक हिस्से में आग लगती है तो समझदार लोग उसे बुझाने के लिए तुरंत आगे आते हैं, क्योंकि उन्हें मालूम है कि आग फैलने पर दूसरे घर भी उसकी चपेट में आ सकते हैं। इसी प्रकार किसी एक देश में उत्पन्न संकट का प्रभाव दूसरे देशों पर भी पड़ सकता है। विश्वयुद्धों के विनाशकारी परिणाम मानवता देख चुकी है। युद्ध किसी के लिए वास्तविक विजय नहीं लाता, क्योंकि उसका नुकसान दोनों पक्षों को उठाना पड़ता है। जिस प्रकार परिवार का कोई सदस्य बीमार होता है तो पूरे परिवार की चिंता बढ़ जाती है, उसी प्रकार देश के संकट के समय प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। राष्ट्र का हित केवल शासन चलाने वालों का विषय नहीं है। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और देश के व्यापक हित के लिए कार्य करे।
 
आज समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक आपसी विश्वास की कमी है। पुराने समय में लोगों के बीच विश्वास और ईमानदारी का विशेष महत्व था। आज सुरक्षा के लिए घरों में अनेक ताले लगाने पड़ते हैं। यह स्थिति हमें सोचने पर विवश करती है कि क्या परिवार और समाज में एक-दूसरे के प्रति भरोसा कमजोर हो रहा है? विश्वास के बिना रिश्ते केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं। एक विद्यालय में बच्चों के सामने पेन और कॉपियाँ रखकर नैतिक शिक्षा के महत्व को समझाने का प्रयोग किया गया। इससे पहले बच्चों को ईमानदारी का महत्व बताया गया और फिर उनकी जिम्मेदारी पर भरोसा किया गया। ऐसी घटनाएँ बताती हैं कि उचित संस्कार और विश्वास का वातावरण तैयार किया जाए तो बच्चों में जिम्मेदारी की भावना विकसित की जा सकती है। नई पीढ़ी को केवल उपदेश देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे अपने आचरण से ईमानदारी और सदाचार का उदाहरण भी देना होगा।
 
राजनीति और सार्वजनिक जीवन में भी विश्वास की रक्षा आवश्यक है। जनता अपने प्रतिनिधियों पर भरोसा करके उन्हें जिम्मेदारी सौंपती है। यदि आश्वासन देने के बाद जनहित की उपेक्षा की जाती है तो लोगों का विश्वास टूटता है। विश्वास बनाए रखने के लिए कथनी और करनी में समानता होनी चाहिए। इसी प्रकार जीवन की कठिन परिस्थितियों में आशा का दामन नहीं छोड़ना चाहिए।  जल विभाग के बड़े पाइपों  का भी दौर देखा है।जिसमें रहने वाले श्रमिकों ने विश्वास व्यक्त किया था कि काम समाप्त होने पर वे दूसरी जगह चले जाएँगे और उन्हें कोई विशेष परेशानी नहीं होगी। उनका विश्वास कठिन परिस्थितियों में भी उन्हें आशावान बनाए हुए था।
 
अतः प्रत्येक नागरिक को आत्मविश्वास के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। महावीर के अहिंसा और करुणा के संदेश को अपनाकर, ईमानदारी को जीवन में उतारकर तथा परस्पर विश्वास को मजबूत बनाकर ही समाज में शांति स्थापित की जा सकती है। अंधकार के बाद प्रकाश आता है और कठिनाइयों के बीच भी नई संभावनाएँ जन्म लेती हैं। आवश्यकता इस बात की है कि हम स्वयं पर विश्वास रखें, दूसरों के प्रति सद्भाव बनाएँ और अपने कर्मों से समाज को बेहतर बनाने का संकल्प लें। यही आत्मविश्वास सुखी व्यक्ति, सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र की आधारशिला है।
          *कांतिलाल मांडोत*

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें