रेउसा सीएचसी के लेबर रूम में प्रसव के नाम पर अवैध वसूली का आरोप, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
रेउसा सीएचसी के लेबर रूम में प्रसव के नाम पर अवैध वसूली का आरोप
रेउसा सीएचसी के लेबर रूम में प्रसव के नाम पर अवैध वसूली का आरोप मरीजों से ₹500 से ₹1,000 तक मांगने और पैसा न देने पर रेफर करने का आरोप। बुधवार सुबह करीब 4 बजे इटौरी गांव की प्रसव पीड़ित महिला को कथित रूप से निजी अस्पताल भेजने का मामला सामने आया। निजी महिला कर्मचारी द्वारा मरीज को बहला-फुसलाकर निजी अस्पताल ले जाने का आरोप है। मामले से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
ब्रेकिंग न्यूज | रेउसा (सीतापुर)
सीतापुर जिले के रेउसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के लेबर रूम में प्रसव सेवाओं के नाम पर मरीजों से अवैध वसूली का गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि यहां प्रसूताओं से 500 से 1,000 रुपये तक की मांग की जाती है और पैसे न देने पर उन्हें निजी अस्पताल रेफर कर दिया जाता हैबुधवार सुबह करीब 4 बजे इटौरी गांव की एक प्रसव पीड़ित महिला के मामले में यह आरोप उजागर हुआ। परिजनों का कहना है कि कथित तौर पर एक निजी महिला कर्मचारी ने महिला को बहला-फुसलाकर निजी अस्पताल ले जाने की कोशिश की। मामले से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कथित अवैध गतिविधियों के दृश्य दिख रहे हैं।
स्थानीय पत्रकार विपिन सिंह भदौरिया ने इस मामले को सोशल मीडिया पर उठाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जिलाधिकारी सीतापुर और मुख्य चिकित्सा अधिकारी सीतापुर को टैग करते हुए जांच की मांग की है। उनके अनुसार, रेउसा सीएचसी के लेबर रूम में प्रसव के नाम पर नियमित रूप से 500 से 1,000 रुपये वसूली का आरोप है और पैसे न देने पर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। सरकारी अस्पतालों में प्रसव सेवाएं निःशुल्क होनी चाहिए। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और जननी सुरक्षा योजना के तहत संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए गरीब परिवारों को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। इसके बावजूद सीएचसी जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अवैध वसूली की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं।
अभी तक स्वास्थ्य विभाग या जिला प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है और वे दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षा की जा रही है कि वे मामले की तुरंत जांच करवाएं, वीडियो की सत्यता की जांच करें और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें। मरीजों को निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, ऐसे में इस तरह के आरोप व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं।
(समाचार स्रोतों और सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित। जांच पूरी होने तक आरोपों को साबित नहीं माना जा सकता।)


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