आरोपी खाद दुकानदार को मिला क्लीनचिट
विभागीय कार्रवाही संदेह के घेरे में
एसएओ ने अपने ही अधिकारी की जांच रिपोर्ट को झुठलाया
सुपौल, स्वतंत्र प्रभात संवाददाता -: जिस पर किसानों के बाजिव कीमत पर खाद बीज दिलाने की जिम्मेदारी हो अगर वही अधिकारीअपने कार्यो का सही निर्वहन करने में विफल हो तो बेचारे किसान क्या करे।जिले के त्रिबेनीगंज नगर परिषद स्थित पूजा ट्रेडर्स नामक खाद दुकान में पाई गई गड़बड़ी और अनियमितताओं को लेकर कृषि विभाग की कार्रवाई की निष्पक्षता अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। जिस खाद विक्रेता के खिलाफ जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने की रिपोर्ट बीएओ ने की थी , उसे अब जिला कृषि पदाधिकारी और अनुमंडल कृषि पदाधिकारी को जोड़ी ने पलक झपकते ही क्लीनचिट दे दिया ।जो चर्चा का विषय बन गया है। खास बात यह है कि अनुमंडल कृषि पदाधिकारी मुकेश कुमार द्वारा दिए गए प्रतिवेदन से पूर्व की जांच रिपोर्ट के कई बिंदुओं पर ही सवाल खड़े होते दिखाई दे रहे हैं।
बताया जाता है कि जांच के दौरान दुकान के लाइसेंसी स्थान और वास्तविक संचालन स्थल को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। इसके बावजूद अनुमंडल कृषि पदाधिकारी मुकेश कुमार का कहना है कि दुकानदार ने दुकान को वाजिब स्थल पर शिफ्ट कर दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि दुकान को अब निर्धारित स्थल पर शिफ्ट किया गया है, तो वर्षों से लाइसेंस में दर्ज स्थान के बजाय दूसरे स्थल पर दुकान संचालित होने की अनियमितता के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
अपने ही अधिकारी की रिपोर्ट को झूठा बता दिया
विभागीय कार्रवाई में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जांच करने वाले अधिकारी की रिपोर्ट और कुछ ही दिन बाद में अनुमंडल कृषि पदाधिकारी के जांच में आसमान धरती अंतर कैसे आ गया। यदि जांच में दुकान के संचालन स्थल और स्टॉक में भारी अंतर कोउजागर किया गया था , तो बाद की रिपोर्टमें उन बिंदुओं को किस आधार पर सही माना गया, यह विभाग को स्पष्ट करना चाहिए।
पीओएस और भौतिक स्टॉक के अंतर पर भी सवाल
खाद की बिक्री और स्टॉक को लेकर पीओएस मशीन में दर्ज आंकड़े तथा भौतिक रूप सेदुकान में उपलब्ध खाद के बीच अंतर मिलने की बात सामने आई थी। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि स्टॉक में अंतर की स्थिति को किस आधार पर संतोषजनक माना गया। क्या अंतर का विधिवत मिलान कराया गया? यदि कराया गया तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है? यही सवाल अब किसानों और खाद कारोबार से जुड़े लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
नकली खाद कैसे असली बन गए
मामले में खाद की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल भी कम गंभीर नहीं हैं। यदि किसी खाद को लेकर नकली या संदिग्ध होने की रिपोर्ट की गईथी, तो उसकी जांच के लिए नमूना कहां भेजा गया और उसकी रिपोर्ट क्या आई, बिना गुणवत्ता जांच के किसी संदिग्ध खाद को सही करार दिए जाने की स्थिति में विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है।
एसएओ के पुराने विवाद भी चर्चा में
अनुमंडल कृषि पदाधिकारी के कार्यकाल को लेकर विभागीय हलकों में पुराने विवादों की चर्चा भी अब तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, पिछले वर्ष 3 मई को प्रखड़ के हरिहरपट्टी में एक कथित अवैध खाद दुकान के खिलाफ शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी पदाधिकारी की भूमिका चर्चा में रही थी। पूर्व पदस्थापना के दौरान उदाकिशुनगंज में भी उनके कार्यकाल को लेकर विवादों की चर्चा होने की बात कही जा रही है।
मामले को लेकर जिला कृषि पदाधिकारी से पूछे जाने पर मिला गोलमोल जवाब भी कई सवालों को जन्म दे रहा है। विभाग यदि पूरी कार्रवाई को नियमसम्मत मानता है, तो उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि जांच में सामने आए प्रत्येक बिंदु का निस्तारण किस आधार पर किया गया और आरोपी दुकानदार को क्लीनचिट का निर्णय किस अधिकारी के स्तर से हुआ। अब सवाल यह है कि क्या विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर लाइसेंसी स्थल, वास्तविक दुकान, पीओएस रिकॉर्ड, भौतिक स्टॉक और खाद की गुणवत्ता जांच से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करेगा या फिर मामला विभागीय फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?


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