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कृषि विभाग बना 'अंधेर नगरी चौपट राजा ' चंद सिक्कों की खनक में बदल दिया साक्ष्य
निलंबित दुकानदार को किया गम्भीर आरोप से मुक्त
अनुमंडल कृषि अधिकारी पर लगा फर्जी जांच रिपोर्ट देने का आरोप
सुपौल स्वतंत्र प्रभात संवाददाता -: सच को झूठ और झूठ को सच बनाने" की कहावत तो आपने सुनी होगी, लेकिन जब सरकारी फाइलों में दर्ज ठोस सबूतों को ही रातों-रात पलट दिया जाए, तो इसे विभाग की लाचारी कहें या 'लेन-देन' का खेल ।बिहार के कृषि मंत्री बिजय कुमार सिन्हा भी इस खेल को देख शर्म महसूस करने लगेंगे कि उनके बिभाग में चम्बल के डाकू से बड़ा लुटेरा सफेदपोश अधिकारी मौजूद हैं। ताजा मामला में सुपौल जिले के त्रिबेनीगंज अनुमंडल में कृषि विभाग की कार्यशैली पर गम्भीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि अनुमंडल कृषि पदाधिकारी मुकेश कुमार ने बीएओ के जांच रिपोर्ट को झुठलाते हुए खाद माफियाओं को अभयदान दिया गया है।जिससे जिला प्रशासन और कृषि विभाग की साख पर गहरा धक्का लगा है।
जांच में मिली थी गम्भीर धांधली, लेकिन एसओ के कृपा बरसने से मुक्त हुआ दुकानदार
मालूम हो कि बीते 4 अगस्त को जिला कृषि पदाधिकारी के निर्देश पर प्रखंड कृषि पदाधिकारी त्रिबेनीगंज ने नगर परिषद वार्ड-25 स्थित पूजा ट्रेडर्स नामक खाद दुकान में छापेमारी की थी। इस दौरान कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई थीं मसलन स्थान परिवर्तन:खाद दुकान लाइसेंस में दर्ज पते से अलग जगह पर अवैध रूप से बर्षो से संचालित थी। स्टॉक व पीओएस में अंतर: डिस्प्ले बोर्ड गायब था और वास्तविक स्टॉक व पीओएस मशीन केअंकित आंकड़ों में भारी गड़बड़ी पाई गई। बिना बिल की खाद: बिना बिल के ‘हरा सोना’ नामक मिक्सर खाद के 10 बैग जब्त किए गए (हालांकि स्थानीय लोगों का दावा है कि संख्या सैकड़ों में थी)। उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत डीएओ ने दुकान का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, बिक्री पर रोक लगाई गई और तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया।
कागज पर निलंबन, सरजमीन पर होती रही बिक्री
आरोपी दुकानदार केनिलंबन के 15 दिनों बाद भी कोई ठोस विभागीय कार्रवाई या केस दर्ज नहीं की गई। बल्कि आरोपी दुकानदार को बचाने के लिए रणनीति तैयार होने लगी।सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बिक्री पर रोक के बावजूद पूजा ट्रेडर्स से धड़ल्ले से खाद की बिक्री जारी रही।
स्थानीय किसानों का कहना है कि जब जिला कृषि अधिकारी खुद दुकान को निलंबित करते हैं, तो फिर उसी दुकान से सरेआम खाद कैसे बिक सकती है? क्या निलंबित दुकान की निगरानी करने वाला कोई नहीं है, या फिर विभागीय अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे हैं? इस बीच 'सेटिंग-गेटिंग' का खेल चलता रहा।
एसओ ने बदली रिपोर्ट, डीएओ ने साधी चुप्पी सूत्रों के मुताबिक, अनुमंडल कृषि अधिकारी मुकेश कुमार जो ऐसे कारनामे के लिए कुख्यात रहे हैं ने प्रखंड कृषि अधिकारी की जांच रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों को ही पूरी तरह से घुमा दिया।और दुकानदार को ऑल इज वेल का प्रमाणपत्र दे दिया। एक तरफ प्रखड़ कृषि पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट में जालसाजी पकड़ में आती है, वहीं दूसरी तरफ एसओ मुकेश की 'क्लीन चिट' रिपोर्ट पर जिला कृषि पदाधिकारी ने बिना किसी गहन पड़ताल के अपने कनीय पदाधिकारी को शर्मसार करने और मनोबल गिराने में कोई कोर कसर नही छोड़ते है। विभागीय अधिकारियों के इन विरोधाभासी बयानों से साफ जाहिर है कि अंदरखाने लाखों रुपये के आर्थिक लेन-देन की चर्चाओं में दम व बल दोनो है।
किसानों के हक पर डाका, स्वतंत्र जांच की उठी मांग
अगर प्राथमिक जांच रिपोर्ट सही थी, तो उसे दरकिनार क्यों किया गया? और अगर रिपोर्ट गलत थी, तो शुरुआती कार्रवाई क्यों हुई? इन सवालों पर कृषि विभाग पूरी तरह निरुत्तर है। कार्रवाई के नाम पर की गई इस 'कागजी खानापूर्ति' का सीधा खामियाजा इलाके के गरीब किसानों को भुगतना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों और किसानों ने मांग की है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराए। यदि जांच में अधिकारी और विक्रेता की मिलीभगत साबित होती है, तो दोनों पर प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन इतना अवश्य है कि अनुमंडल कृषि पदाधिकारी मुकेश कुमार के इस हैरत अंग्रेज कारनामो और पैसे के खातिर अपना ईमान गिरवी रखने की चर्चा चारो तरफ हो रही है।
अनुमंडल कृषि पदाधिकारी मुकेश कुमार का बयान: "दुकानदार को लाइसेंस वाले स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है। कोई गड़बड़ी नहीं है और उनके पास 'हरा सोना' खाद का वैध लाइसेंस है।"जिला कृषि पदाधिकारी नीतीश कुमार भारती का अजीबोगरीब जवाब: "त्रिबेनीगंज एसओ की रिपोर्ट के आधार पर दुकानदार को निलंबन मुक्त कर दिया गया है। मुझे आगे की कोई जानकारी नहीं है।


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