बाली वध लीला में राम ने शबरी को दिया नवधा भक्ति का ज्ञान, हनुमान ने कराई राम-सुग्रीव मैत्री 

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कोंच) जालौन)- कोंच रामलीला के चल रहे 174वें महोत्सव में शनिवार रात्रि रामलीला रंगमंच पर बाली वध लीला का रोमांचक मंचन देख दर्शक अभिभूत हो उठे। शबरी के गाए भक्ति गीतों और तारा के गाए प्रणय गीतों ने मंचन को प्रभावोत्पादक बनाने का काम किया।
 
बाली वध प्रसंग से पूर्व सीता अन्वेषण में निकले राम ने अपनी परम भक्त भीलनी शबरी को दर्शन देकर और उसके जूठे बेर खाकर समाजवाद की आधारशिला त्रेता युग में ही रख दी थी। शबरी के बताए अनुसार राम ने अपने भाई बाली के त्रास से छिपकर रह रहे सुग्रीव से मैत्री की और वचनानुसार बाली का वध कर सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाया।
 
परमात्म तत्व में विलीन होने जा रहे बालि की अंतिम इच्छा पूरी करते हुए राम ने उसके बेटे अंगद को किष्किंधा का युवराज भी बनाया। प्रभु राम शबरी को नवधा भक्ति का ज्ञान देकर उसके बताए अनुसार सुग्रीव से मिलने ऋष्यमूक पर्वत पर जाते हैं जहां उनका साक्षात्कार हनुमान से होता है और राम-सुग्रीव मैत्री के बाद राम सुग्रीव को दिए वचनानुसार बाली के ऊपर वृक्ष की ओट लेकर वाण चला देते हैं। घायल पड़ा बाली अपने अहंकार में कहता है, 'बाली का विनाश नहीं यह वीरता का ह्रास है, विश्व में खलों के मान दर्प बढ जाएंगे। पूजा नित्य होगी शंख झालर बजेगी, मंदिरों में आपकी प्रतिमा पधराएंगे, किंतु हे नाथ कलंक के अंक सिर से न मिट पाएंगे'।
 
इस प्रकार हे राम-हे राम कहता हुआ बाली राम के धाम को चला जाता है। प्रभु राम सुग्रीव को किष्किंधा का राजा और अंगद को युवराज घोषित कर देते हैं। मंचन के दौरान श्रृंगार, प्रणय और सिखावन गीतों 'प्रणय के देवता तुम पर है बलिहारी सदा तारा', 'कोयल कूक रही मदमाती, कोयल', 'समुझ मोरे सैंया, पैंयां पड़ूं कर जोर' ने मंचन में चार चांद लगाए। बाली की भूमिका रूपेश सोनी, सुग्रीव दुर्गेश शुक्ला, शबरी प्रमोद सोनी, तारा रुचिर रस्तोगी, हनुमान राघवेंद्र तिवारी चमेंड़, कबंध जवाहर अग्रवाल व सखियों की भूमिका में सुनील तिवारी और आकाश शांडिल्य रहे।
 
 

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