सुप्रीमकोर्ट जजों की भी नहीं सुनती सरकार, धरना देने की मौखिक चेतावनी

दिल्ली हाईकोर्ट क्रॉसिंग के पास स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप्स लगाने का सुझाव दिया

हर्षिता यादव  Picture
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स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के पास पैदल यात्रियों के लिए क्रॉसिंग न होने पर फिर से चिंता जताई। कोर्ट ने मौखिक रूप से चेतावनी दी कि अगर अगली सुनवाई तक कोई कार्रवाई नहीं की जाती है, तो जजों को खुद वहां आकर धरना देना पड़ेगा। 

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने मथुरा रोड क्रॉसिंग पर पैदल यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर यह बात कही। इस जगह से कोर्ट आने वाले लोगों और आम जनता की काफी आवाजाही रहती है। 15 सितंबर को सीनियर एडवोकेट और एमिकस (न्याय मित्र) गौरव अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने वहां एक रेड लाइट लगाई है, लेकिन बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट क्रॉसिंग के पास स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप्स लगाने का सुझाव दिया।

जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि यह मामला बहुत महत्वपूर्ण है और चेतावनी दी थी कि जज खुद वहां जाकर देखेंगे कि जरूरी काम हुआ है या नहीं। इसके बाद 5 अक्टूबर को कोर्ट ने फिर निर्देश दिया कि मथुरा रोड पर दिल्ली हाईकोर्ट और नेशनल जूलॉजिकल गार्डन के पास प्राथमिकता के आधार पर पैदल यात्रियों के लिए क्रॉसिंग बनाई जाए। 

शुक्रवार को जब यह मामला सुनवाई के लिए आया तो एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) विक्रमजीत बनर्जी ने बताया कि यह मुद्दा केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई हाई-लेवल कमिटी के पास है, जो यह तय करेगी कि क्रॉसिंग पर क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

इस पर जस्टिस पारदीवाला ने मौखिक रूप से कहा कि कमिटी ठीक हो सकती है, लेकिन ठोस कार्रवाई होनी चाहिए; वरना बेंच को मुख्य सचिव (चीफ सेक्रेटरी) को कोर्ट में बुलाने का आदेश देना पड़ेगा। बेंच ने मौखिक रूप से चेतावनी दी कि अगर 25 नवंबर तक कोई कार्रवाई नहीं होती है तो जज खुद दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर जाकर बैठ जाएंगे (ASG के साथ), और तब तक नहीं हटेंगे, जब तक कि यह मुद्दा सुलझ नहीं जाता।

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