ग्राम पंचायत दिघुली में पानी सप्लाई और मरम्मत के नाम पर लाखों के भुगतान का आरोप, जांच की मांग
टैंकर से पानी सप्लाई, इंटरलॉकिंग और समरसेबल लगाने के कार्यों में अनियमितता का ग्रामीणों ने लगाया आरोप
मीरजापुर।
मीरजापुर।हलिया विकासखंड की ग्राम पंचायत दिघुली में पानी की सप्लाई, इंटरलॉकिंग निर्माण और मरम्मत के नाम पर किए गए भुगतानों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर कथित अनियमितता का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में कराए गए कई कार्यों और उनके नाम पर निकाली गई धनराशि के बीच अंतर दिखाई देता है।

ग्रामीणों के अनुसार, गर्मी के दिनों में पेयजल संकट से निपटने के लिए टैंकर के माध्यम से पानी की सप्लाई कराई गई थी। उनका दावा है कि टैंकर लगभग एक महीने तक ही चला, जबकि पानी सप्लाई के नाम पर लाखों रुपये के भुगतान की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों ने संबंधित भुगतान और वास्तविक सप्लाई की अवधि की जांच कराए जाने की मांग की है, ताकि स्पष्ट हो सके कि सरकारी धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हुआ या नहीं।
इंटरलॉकिंग और ईंटों के इस्तेमाल पर भी सवाल
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत में पुरानी इंटरलॉकिंग ईंटों को हटाकर डमरू की ईंटों तथा नई इंटरलॉकिंग लगाए जाने के कार्य पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुरानी ईंटों को निकलवाने और उनके उपयोग के संबंध में ग्रामीणों को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि निकाली गई ईंटों का इस्तेमाल ग्राम प्रधान ने अपने निजी कार्य में किया। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित अभिलेखों और ईंटों के वास्तविक उपयोग की जांच आवश्यक है।
चार वर्षों तक मरम्मत के नाम पर भुगतान का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत में एक वर्ष के दौरान कराए गए कार्यों के बाद अगले चार वर्षों तक मरम्मत और रखरखाव के नाम पर लगातार भुगतान किया गया। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि आखिर किन कार्यों की मरम्मत कराई गई और उन पर कितनी धनराशि खर्च हुई। उनका कहना है कि भुगतान से संबंधित बिल, वाउचर, कार्यस्थल की स्थिति और अन्य अभिलेखों की जांच होने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
समरसेबल के भुगतान के बावजूद हैंडपंप लगाने का दावा
ग्रामीणों ने आरआरसी सेंटर के पास समरसेबल लगाने के नाम पर भुगतान किए जाने का भी आरोप लगाया है। उनका दावा है कि मौके पर समरसेबल लगाने के बजाय हैंडपंप लगाया गया है। यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो भुगतान और वास्तविक कार्य के बीच अंतर की जांच जरूरी होगी। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मौके का निरीक्षण कराकर भुगतान की वास्तविकता सामने लाने की मांग की है।
सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी
ग्रामीणों का आरोप है कि हलिया विकासखंड की कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर कागजी खानापूर्ति की जा रही है, जबकि पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि पंचायतों में कराए गए कार्यों की गुणवत्ता, खर्च की गई धनराशि और योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत दिगुली में पानी सप्लाई, इंटरलॉकिंग, मरम्मत तथा समरसेबल से संबंधित भुगतानों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर कार्यों का सत्यापन करें और अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें।
अब जांच पर टिकी निगाहें
ग्राम पंचायत दिगुली में लगाए गए आरोपों के बाद अब संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक पक्ष का इंतजार है। आरोपों की पुष्टि अभिलेखों, भुगतान विवरण और स्थलीय निरीक्षण के आधार पर ही हो सकेगी। यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
सचिव गौरव राणा का बयान
पानी के नाम पर पैसे खर्च किए गए हैं लेकिन जितना आरोप लगाया गया है उतना नहीं खर्च हुआ है पर खर्च हुआ है


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