विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर बंदियों को तनाव प्रबंधन के प्रति किया जागरूक

मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना महत्वपूर्ण, समय पर परामर्श और उपचार लेने का दिया संदेश

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सितारगंज। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शनिवार को केंद्रीय कारागार सितारगंज में बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और सकारात्मक जीवनशैली को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के प्रति जागरूक करना, तनाव से निपटने के उपायों की जानकारी देना तथा मानसिक समस्याओं की स्थिति में उचित परामर्श और उपचार प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ऊधम सिंह नगर के सचिव, रुद्रपुर के मनोचिकित्सक तथा बैंक ऑफ बड़ौदा ऊधम सिंह नगर के समन्वयक सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने प्रतिभाग किया।
 
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने बंदियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी विभिन्न महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य का व्यक्ति के विचारों, व्यवहार, भावनाओं और दैनिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति का सकारात्मक सोच अपनाना, परिस्थितियों का धैर्यपूर्वक सामना करना तथा अपनी भावनाओं को समझना आवश्यक है। उन्होंने बंदियों को मानसिक तनाव के संभावित कारणों और उससे निपटने के व्यावहारिक उपायों के बारे में भी जानकारी दी।
 
कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में व्याप्त झिझक और गलत धारणाओं को दूर करना जरूरी है। मानसिक तनाव या किसी अन्य परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति को सहयोग और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। समय पर परामर्श मिलने से व्यक्ति अपनी समस्याओं को बेहतर ढंग से समझ सकता है और उनसे निपटने के लिए उचित कदम उठा सकता है।
 
इस अवसर पर केंद्रीय कारागार सितारगंज के प्रभारी कारापाल प्यारेलाल आर्य ने कहा कि कारागार प्रशासन का उद्देश्य केवल सुरक्षा एवं अनुशासन बनाए रखना ही नहीं, बल्कि बंदियों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण को सुनिश्चित करना भी है। मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति के समग्र विकास का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए बंदियों को सकारात्मक वातावरण, उचित मार्गदर्शन और आवश्यक परामर्श उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
 
उन्होंने कहा कि बंदियों में आत्मविश्वास विकसित करने, उन्हें सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने और समाज की मुख्यधारा में दोबारा स्थापित होने के लिए तैयार करना कारागार प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि सुधारात्मक व्यवस्था के तहत बंदियों को अपनी सोच और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि वे भविष्य में बेहतर जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ सकें।
 
कार्यक्रम के माध्यम से बंदियों को यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य के समान महत्वपूर्ण है। जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखने के लिए देखभाल और उपचार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए भी जागरूकता, उचित मार्गदर्शन और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता जरूरी है।
 
केंद्रीय कारागार सितारगंज में आयोजित यह कार्यक्रम बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और उनके कल्याण को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों से बंदियों को अपनी मानसिक स्थिति को समझने, तनाव का सामना करने और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। साथ ही, यह पहल कारागार में सुधारात्मक एवं पुनर्वासात्मक व्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायक साबित हो सकती है।

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