भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा संपन्न

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स्वंतंत्रप्रभात ब्यूरो 
 
प्रयागराज  
 
गोविन्द वल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान में शनिवार को "भारतीय ज्ञान प्रणाली : पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चुनौतियों के बीच सेतु" विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर *राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय  संस्कृति विभाग, प्रयागराज द्वारा भारतीय ज्ञान प्रणाली के ग्रंथीय साक्ष्य  विषयक पांडुलिपियों की छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया । 
 
भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और उसे आधुनिक ज्ञान की चुनौतियों से जोड़ने के उद्देश्य से गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, झुंसी, प्रयागराज में  "भारतीय ज्ञान प्रणाली पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चुनौतियों के बीच सेतु" विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर भारतीय ज्ञान प्रणाली के ग्रन्थीय साक्ष्य विषयक दुर्लभ पाण्डुलिपियों की छायाचित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रो. अजय तनेजा, कुलपति ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय लखनऊ तथा प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह, निदेशक, गोविन्द बल्लभ सामाजिक विज्ञान संस्थान ने संयुक्त रूप से किया l
इस अवसर पर नीति आयोग के डॉ कुमार संजय, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी की महानिदेशक डॉ प्रिया राय सहित डॉ बी. के. सिंह, पुस्तकालयाध्यक्ष इलाहाबाद विश्वविद्यालय,प्रयागराज भी उपस्थित थे l 
 
इस अवसर पर अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि डॉक्टर तनेजा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में पांडुलिपियों का महत्वपूर्ण स्थान है उन्होंने यह भी बताया कि भारत सरकार के ज्ञान भारतम मिशन द्वारा इन पांडुलिपियों को पांच चरणों में क्रमशः संरक्षित एवं सुरक्षित किया जा रहा है l
इस प्रदर्शनी में ऋग्वेद संहिता, वाजसनेयी संहिता, सामवेद, यजुर्वेद संहिता, भागवत् महापुराण से सम्बन्धित गोपिकागीत, सन् 1611 ई0 की महाभारत, नवरत्नकाव्य, सन् 1635 ई0 में लिखित अभिज्ञान शाकुंतलम, सन् 1659 के पाण्डवगीता, सन् 1713 ई0 में लिखित मेघदूत, सन् 1794 ई0 की रामचरितमानस, सन् 1802 ई0 की लघु चाणक्य नीति,, सन् 1833 ई0 की गीत गोविन्द, सन् 1868 ई0 की लीलावती, सन् 1869 की सचित्र पाण्डुलिपि के छायाचित्र, सन् 1873 ई0 में लिखित राजतरंगिणी, भागवत् पुराण, संगीत रत्नाकर, रघुवंश महाकाव्य, नैषधीयचरित, योगसूत्र, विल्हण कवि की विक्रमांक देवचरित, शिशुपाल वध, भगवान श्रीकृष्ण से सम्बन्धित पाण्डुलिपियों के मनोहारी चित्र, ताड़पत्र की पाण्डृलिपियों के छायाचित्र तथा, बल्लभाचार्य जयति स्तोत्र, महर्षि भृगु की भृगु संहिता, शंकराचार्य विरचित श्री कृष्णाष्टकम, आचार्य सायण का वेदार्थ प्रकाश, श्री रामानुजाचार्य का श्रीभाष्य, भाष्कराचार्य का लीलावती व सूर्य सिद्धान्त, वाराहमीहिर का लघुजातक व योगाध्याय के साथ-साथ फारसी भाषा में वर्णित महाभारत, भागवत महापुराण, पद्मपुराण, लीलावती, रामायण मसीही के छायाचित्र भी प्रदर्शित किये गये हैं l
 
 प्रदर्शनी में विभिन्न प्रांतों से आए हुए पुस्तकालयाध्यक्षों व अन्य अतिथियों तथा दर्शकों के पांडुलिपि अधिकारी गुलाम सरवर के द्वारा आभार व्यक्त किया गया l
इस अवसर पर गोपाल मोहन शुक्ला पुस्तकालय अध्यक्ष राजकीय पब्लिक लाइब्रेरी प्रयागराज, बृजभूषण मिश्रा पुस्तकालय अध्यक्ष जीबी पंत संस्थान झूसी प्रयागराज, हरिश्चंद्र दुबे,अजय मौर्या मोहम्मद शफीक तथा सम्मेलन के समस्त प्रतिभागी एवं संस्थान के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे 
 
 

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