कागजों में पाइपलाइन में बह रहा 'शुद्ध जल', धरातल पर बूंद-बूंद को तरस रही 22 गांव की हजारों की आबादी

सरकार और जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर ग्रामीण परिवार के घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाना था, लेकिन सिद्धार्थनगर जिले के बर्डपुर ब्लाक में यह महत्वाकांक्षी योजना भ्रष्टाचार, विभागीय अनदेखी और कार्यदायी संस्थाओं की लापरवाही के चलते पानी फेर गया।

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स्वतंत्र प्रभात संवाददाता 
 
सिद्धार्थनगर।
 
सरकार और जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर ग्रामीण परिवार के घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाना था, लेकिन सिद्धार्थनगर जिले के बर्डपुर ब्लाक में यह महत्वाकांक्षी योजना भ्रष्टाचार, विभागीय अनदेखी और कार्यदायी संस्थाओं की लापरवाही के चलते पानी फेर गया। इसके चलते करीब 22 गांवों की हजारों की आबादी शुद्ध पानी के लिए तरस रही है, जबकि कागजों में पाइपलाइन में पानी की धारा बह रही है। वित्तीय वर्ष 2023-24में जब जिले के बर्डपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत बर्डपुर नम्बर 3 में पाइपलाइन बिछाने, ओवरहेड टैंक बनाने और पंप हाउस स्थापित करने की नींव रखी गई थी, तब ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें दूषित पानी और जल जनित। बीमारियों से निजात मिल जाएगी, लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी तस्वीर नहीं बदली और हर घर जल का दावा सिर्फ  फाइलों तक ही सीमित रह गया है।
 
निर्धारित समयसारणी के मुताबिक अब तक चौथे चरण की सभी परियोजनाओं का काम मुकम्मल होकर ग्रामीणों के घरों तक पानी की आपूर्ति शुरू हो जानी चाहिए थी। अफसोस की बात यह है कि चौथे चरण की बात तो दूर, दूसरे और तीसरे चरण के निर्माण कार्य भी पूरी तरह अधर में लटके हुए हैं। लेकिन विभागीय अधिकारियों के ढीले रवैये का ही नतीजा है कि  अब तक जिले के बर्डपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत बर्डपुर नम्बर 3 के 22गांवों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था चालू नहीं कर सकी हैं।
 
*बोले ग्रामीण* 
 
ग्राम पंचायत बर्डपुर नम्बर 3  के ग्रामीणों का कहना है कि  गांव में तो पाइप बिछा दिए गए है, पहले टंकी लगना चाहिए, तब पाइप लगना चाहिए। टंकी लगी नहीं, ग्रामीणों ने कहा कि जल जीवन मिशन योजना पूरी तरह से फ्लॉप है। टंकी बनी नहीं और बनने से पहले घास उग भी गई, बाउंड्री में दरार हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की टंकी बनी ही नहीं। लेकिन सौरऊर्जा का व्यवस्था पहले किया है।
 
*क्या कहते हैं  अधिकारी* 
 
इस सम्बन्ध में जेई अभय प्रताप सिंह का कहना है कि यह प्रोजेक्ट वित्तीय वर्ष 2023-24 में ही पूरा होना था लेकिन अब इसे  दिसम्बर 2028 तक बढ़ा दिया गया है, धनाभाव के चलते कार्य रुका हुआ है।

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