जनजातीय ज्ञान और औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण को आगे आया CSIR-NBRI
सोनभद्र में शोध, दुर्लभ पौधों के संरक्षण के साथ जनजातीय आजीविका संवर्धन पर जोर
राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट)
सोनभद्र/उत्तर प्रदेश
जनपद के गोंड, बैगा, पनिका, चेरो और खरवार जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान एवं औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए CSIR-NBRI लखनऊ शोध कार्य करेगा। इसी क्रम में शनिवार को संस्थान के वैज्ञानिकों ने जिलाधिकारी चर्चित गौड़ से मुलाकात कर परियोजना के उद्देश्यों एवं कार्ययोजना पर चर्चा की।

भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा प्रायोजित इस परियोजना का नेतृत्व CSIR-NBRI के निदेशक डॉ. जहीर अहमद और मुख्य वैज्ञानिक डॉ. शरद श्रीवास्तव कर रहे हैं। इसका उद्देश्य जनजातीय समुदायों के पारंपरिक औषधीय ज्ञान का संकलन एवं दस्तावेजीकरण करने के साथ दुर्लभ और संकटग्रस्त जैव संसाधनों की पहचान कर उनका संरक्षण करना है।
परियोजना के तहत जनजाति बहुल क्षेत्रों में सर्वेक्षण कर औषधीय पौधों की पहचान, संरक्षण और उनकी खेती की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा। साथ ही स्थानीय जैव संसाधनों के समुचित उपयोग से जनजातीय समुदायों की आजीविका और सामाजिक-आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा।
परियोजना का क्षेत्रीय क्रियान्वयन वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मंजूषा श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण में किया जा रहा है। इसमें प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विक्रमा सिंह सहित अनिल द्विवेदी, अनुपमा देवी और दिव्यान्श राज सहयोग कर रहे हैं।


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