तीन दशक पहले डॉ. विश्वास ने रखी थी दुर्गा पूजा महोत्सव की नींव, आज शुकुल बाजार की पहचान बना भव्य आयोजन

अमेठी, अयोध्या, बाराबंकी, रायबरेली से लेकर शिमला तक के लोग पहुंचते हैं महोत्सव देखने, आपसी सौहार्द और भाईचारे की मिसाल बना आयोजन

Abhinav Shukla Picture
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शुकुल बाजार, अमेठी। आस्था, भक्ति, कला, संस्कृति और सामाजिक सौहार्द का अनूठा संगम देखना हो तो शारदीय नवरात्रि के दौरान अमेठी जनपद के शुकुल बाजार कस्बे का रुख करना चाहिए। लगभग तीन दशक पूर्व डॉ. विश्वास द्वारा शुरू किया गया दुर्गा पूजा महोत्सव आज अपनी भव्यता, आकर्षक सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के चलते क्षेत्र की विशिष्ट पहचान बन चुका है। स्थानीय स्तर पर इसे अमेठी जनपद के प्रमुख दुर्गा पूजा आयोजनों में गिना जाता है।
 
नवरात्रि और दशहरा के अवसर पर यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ आयोजन की लोकप्रियता को दर्शाती है।शुकुल बाजार का दुर्गा पूजा महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, सामूहिक सहभागिता और सामाजिक एकता का प्रतीक भी बन गया है। शारदीय नवरात्रि आते ही कस्बे की गलियां, प्रमुख चौराहे और बाजार आकर्षक रोशनी से जगमगा उठते हैं। पूरे कस्बे को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। भव्य पंडाल, आकर्षक विद्युत सजावट, मां दुर्गा की मनमोहक प्रतिमाएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।
 
विशाल कुंभकरण की प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र
दुर्गा पूजा महोत्सव के दौरान दशहरा पर्व की रौनक देखते ही बनती है। विशेष रूप से कुंभकरण की विशाल प्रतिमा लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहती है। प्रतिमा की भव्यता और आयोजन की विशेष सजावट देखने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में महोत्सव को लेकर उत्साह देखने को मिलता है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ दशहरा की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर भी यहां मिलता है।
 
कटरा चौराहा से मेन मार्केट तक सजे रहते हैं भव्य पंडाल
शुकुल बाजार में दुर्गा पूजा के प्रमुख आयोजन स्थलों में नवदुर्गा पूजा समिति कटरा चौराहा, नवदुर्गा पूजा समिति मेन मार्केट तथा पांडेगंज चौराहे के पंडाल विशेष आकर्षण का केंद्र रहते हैं। इन स्थानों पर मां दुर्गा की आकर्षक प्रतिमाओं के साथ पंडालों की सजावट और रोशनी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देती है। प्रत्येक आयोजन स्थल की अपनी अलग विशेषता है, जो महोत्सव की भव्यता में चार चांद लगाती है।
 
पूजा समितियों की ओर से श्रद्धालुओं की आस्था और रुचि को ध्यान में रखते हुए धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्था की जाती है। जागरण, झांकियों और कलाकारों की प्रस्तुतियों के माध्यम से भक्तिमय वातावरण निर्मित होता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले कलाकारों की प्रस्तुतियां भी इस महोत्सव को विशेष बनाती हैं। इन कार्यक्रमों को देखने के लिए देर रात तक लोगों की आवाजाही बनी रहती है।
 
कई जनपदों से पहुंचते हैं श्रद्धालु और दर्शक
शुकुल बाजार के दुर्गा पूजा महोत्सव की लोकप्रियता अब स्थानीय सीमाओं से आगे बढ़ चुकी है। अमेठी के साथ अयोध्या, बाराबंकी और रायबरेली सहित आसपास के जनपदों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। इतना ही नहीं, शिमला जैसे दूरस्थ शहर से भी लोगों के महोत्सव देखने आने की जानकारी आयोजन की व्यापक पहचान को दर्शाती है।दूर-दराज से आने वाले लोगों के लिए यहां की भव्य सजावट, धार्मिक वातावरण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और दशहरा की विशेष तैयारियां आकर्षण का केंद्र रहती हैं। स्थानीय लोगों के लिए यह महोत्सव सालभर प्रतीक्षित रहने वाला उत्सव है, जबकि बाहर से आने वाले दर्शकों के लिए यह क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से जानने का अवसर बनता है।
 
विकासखंड में एक सैकड़ा से अधिक प्रतिमाएं होती हैं स्थापित
विकासखंड शुकुल बाजार क्षेत्र में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर एक सैकड़ा से अधिक स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। विभिन्न गांवों और कस्बों में पूजा समितियां श्रद्धा और उत्साह के साथ धार्मिक आयोजन करती हैं। हालांकि, शुकुल बाजार कस्बे की भव्य सजावट, प्रमुख चौराहों पर सजे आकर्षक पंडाल और बड़े स्तर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम इसे विशेष पहचान प्रदान करते हैं।नवरात्रि के दौरान पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है। मंदिरों और पूजा पंडालों में पूजा-अर्चना, आरती तथा धार्मिक कार्यक्रमों के बीच श्रद्धालु मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। जगह-जगह होने वाले आयोजन ग्रामीण संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।
 
सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल
शुकुल बाजार के दुर्गा पूजा महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता इसकी धार्मिक भव्यता के साथ सामाजिक समरसता भी है। आयोजन के दौरान विभिन्न समुदायों के लोग आपसी सहयोग, सद्भाव और भाईचारे के साथ अपनी सहभागिता निभाते हैं। सामूहिक प्रयासों से तैयार होने वाले पंडाल और सांस्कृतिक कार्यक्रम सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं।
 
लगभग तीन दशक पहले शुरू हुई यह परंपरा आज नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का माध्यम बन चुकी है। समय के साथ आयोजन का स्वरूप और भव्यता बढ़ी है, लेकिन मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा, सामूहिक सहभागिता और आपसी सौहार्द इसकी मूल भावना बने हुए हैं।कुल मिलाकर, शुकुल बाजार का दुर्गा पूजा महोत्सव धार्मिक आस्था, आकर्षक कलात्मक प्रस्तुतियों, भव्य सजावट और सामाजिक एकता का ऐसा संगम है, जिसने इसे अमेठी जनपद के प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों में विशिष्ट स्थान दिलाया है। मां दुर्गा की आराधना से लेकर दशहरा की रौनक तक, यह महोत्सव क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
 
 

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