अभाविप की मांग पर उत्तर प्रदेश कैबिनेट द्वारा मेडिकल इंटर्न्स का स्टाइपेंड बढ़ाने का स्वागत 

अभाविप ने पूर्व में उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री ब्रजेश पाठक जी को ज्ञापन सौंपकर की थी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग

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कानपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, उत्तर प्रदेश कैबिनेट द्वारा प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों, संस्थानों एवं चिकित्सा विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस (MBBS) एवं बीडीएस (BDS) इंटर्न्स के मासिक स्टाइपेंड को ₹12,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने के निर्णय का स्वागत करती है। यह निर्णय प्रदेश के मेडिकल विद्यार्थियों एवं इंटर्न्स की लंबे समय से चली आ रही न्यायसंगत मांग को स्वीकार किए जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
 
अभाविप ने मेडिकल इंटर्न्स के सम्मानजनक स्टाइपेंड की मांग को लेकर शासन-प्रशासन के समक्ष लगातार विषय उठाया तथा पूर्व में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री ब्रजेश पाठक जी को ज्ञापन सौंपकर स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग की थी।
 
मेडिकल इंटर्न्स स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इंटर्नशिप के दौरान उन्हें लंबे ड्यूटी आवर्स, रात्रिकालीन एवं आपातकालीन ड्यूटी, मरीजों की निरंतर देखभाल तथा चिकित्सकीय जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ता है। प्रशिक्षण की इस महत्वपूर्ण अवधि में सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण अनेक इंटर्न्स को दैनिक जीवन, आवागमन, भोजन एवं अन्य आवश्यक खर्चों का प्रबंधन करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
 
केंद्रीय संस्थानों एवं अन्य राज्यों के सापेक्ष प्रदेश में इंटर्न्स को मिलने वाले स्टाइपेंड में असमानता का विषय भी अभाविप द्वारा प्रमुखता से उठाया गया था। ऐसे में स्टाइपेंड में वृद्धि उनके परिश्रम एवं जिम्मेदारियों के अनुरूप आवश्यक आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
 
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय मंत्री श्री अभय प्रताप सिंह ने कहा कि, "मेडिकल इंटर्नशिप की अवधि युवा चिकित्सकों के लिए सीखने के साथ-साथ अत्यंत चुनौतीपूर्ण भी होती है। लंबे ड्यूटी आवर्स, लगातार रात्रिकालीन एवं आपातकालीन ड्यूटी, मरीजों की गंभीर स्थिति से निपटना और अस्पताल की जिम्मेदारियों के बीच इंटर्न्स को अपनी पढ़ाई एवं व्यक्तिगत आवश्यकताओं का भी प्रबंधन करना पड़ता है।
 
सीमित स्टाइपेंड के कारण विशेषकर दूसरे शहरों में रहकर इंटर्नशिप करने वाले विद्यार्थियों के सामने आवास, भोजन, आवागमन और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करने की कठिनाई बनी रहती है। ऐसे में स्टाइपेंड को ₹12,000 से बढ़ाकर ₹25,000 किया जाना उनके श्रम, जिम्मेदारियों और कठिन परिस्थितियों को समझते हुए लिया गया संवेदनशील निर्णय है। अभाविप लंबे समय से इन समस्याओं को शासन के समक्ष उठाती रही है और हमें प्रसन्नता है कि सरकार ने इस महत्वपूर्ण मांग पर सकारात्मक निर्णय लिया है।"

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