असम विश्वविद्यालय में ड्रोन प्रौद्योगिकी पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू

ड्रोन तकनीक में छात्रों को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण, नवाचार और उद्यमिता पर जोर

Swatantra Prabhat UP Picture
Published On

 श्रीभूमि : छात्रों में ड्रोन प्रौद्योगिकी से जुड़े तकनीकी कौशल विकसित करने तथा नवाचार और उद्यमशील सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से असम विश्वविद्यालय, शिलचर में ड्रोन प्रौद्योगिकी एवं इसके अनुप्रयोगों पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन 25 अगस्त को कृषि अभियांत्रिकी विभाग में किया गया। शिविर 29 अगस्त तक चलेगा। शिविर का आयोजन एनआईटी, शिलचर ने असम विश्वविद्यालय के कृषि अभियांत्रिकी विभाग, 3डी प्रिंटिंग प्रयोगशाला और उद्यमिता विकास केंद्र के सहयोग से किया है।

कार्यक्रम को जेट एयरोस्पेस एविएशन रिसर्च सेंटर का सहयोग प्राप्त है, जबकि तकनीकी सहायता आईआईटी दिल्ली के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत स्थापित प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र आईएचएफसी द्वारा प्रदान की जा रही है। स्वागत भाषण में कृषि अभियांत्रिकी विभाग की प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ. अजिता तिवारी ने तेजी से विकसित हो रही मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तकनीकी क्षमता मजबूत करने और नवाचार को बढ़ावा देने में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की महत्ता पर प्रकाश डाला।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को यूएवी और ड्रोन के डिजाइन एवं संचालन, संबंधित नियम-कानून तथा कृषि, निगरानी, मानचित्रण और आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में इसके अनुप्रयोगों की जानकारी दी जा रही है। प्रतिभागियों को ड्रोन के संयोजन, अंशांकन और उड़ान संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में विशेष रूप से कृषि अभियांत्रिकी विभाग के स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रों के तकनीकी कौशल को विकसित करने तथा ड्रोन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए और अभिनव विचारों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है।

इस अवसर पर प्रोफेसर देबमाल्य घोष ने युवाओं में उद्यमशील मानसिकता विकसित करने में ऐसे कार्यक्रमों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कौशल विकास युवाओं की रचनात्मकता और ज्ञान को व्यावहारिक एवं नवोन्मेषी उद्यमों में बदलने का महत्वपूर्ण माध्यम है। एनआईटी, शिलचर के डॉ. रंजन हाजरा और डॉ. बादल ने भी प्रशिक्षण शिविर को क्षमता निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उपलब्ध संभावित प्रशिक्षुता के अवसरों की जानकारी दी। सहयोगी संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा ड्रोन की संरचना, नियंत्रण प्रणाली, विभिन्न उपकरणों के एकीकरण तथा कृषि, निगरानी, मानचित्रण और आपदा प्रबंधन में इसके अनुप्रयोगों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें