इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि वह वित्तीय सहायता योजना के तहत वकीलों के आश्रितों के लिए मुआवज़ा बढ़ाए

इस योजना का फंड ₹20 करोड़ से बढ़कर ₹330 करोड़ हो गया है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह दिवंगत वकीलों के आश्रितों को दिए जाने वाले मुआवज़े की राशि बढ़ाने पर विचार करे [ज्योतिमा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व 2 अन्य]। जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीज़न बेंच ने गौर किया कि 'वकीलों के लिए वित्तीय सहायता योजना' के तहत मुआवज़े की रकम 2015 में ₹5 लाख तय की गई थी और तब से, इस योजना का फंड ₹20 करोड़ से बढ़कर ₹330 करोड़ हो गया है।
 
हालांकि, कोर्ट ने देखा कि मुआवज़े की रकम अभी भी ₹5 लाख ही है। इसलिए, कोर्ट ने सरकार से मुआवज़े की रकम बढ़ाने पर विचार करने को कहा। कोर्ट ने निर्देश दिया, "सरकार एक हलफनामा (affidavit) पेश करे कि वह वित्तीय सहायता योजना के तहत मुआवज़े की रकम में कितनी बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव रखती है; हम यह फैसला राज्य सरकार की समझदारी पर छोड़ते हैं।
 
अगर अगली तारीख तक इस मामले में सही हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, तो कोर्ट को इस मामले पर सख़्त रुख अपनाना पड़ेगा।" कोर्ट एक वकील की विधवा की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। उन्होंने ₹5 लाख के मुआवज़े के लिए अपनी अर्ज़ी पर फ़ैसला होने में हुई देरी के कारण ब्याज की मांग की थी। उन्होंने 2020 में मुआवज़े के लिए अर्ज़ी दी थी, लेकिन भुगतान 2025 में हुआ।

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