हरैया में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कथित फर्जी अस्पतालों का जाल जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे रहे सवाल

अस्पतालों से मरीज को प्राइवेट हॉस्पिटल में ट्रांसफर करने और इलाज करने के अभाव में हो रहे मौत सामुदायिक स्वास्थ्यकेंद्रहरैया में बाहर की दवाई लिखी जा रही है

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बस्ती। बस्ती जिले हरैया कस्बे के कई ऐसे चिकित्सा केंद्र संचालित जिनके वास्तविक स्थिति की जिम्मेदार विभाग द्वारा नियमित जांच तक नहीं कहीं दाई मरीजों का इलाज करती नजर आती तो कहीं अनुभव योग्यता के नाम पर ही उपचार का सिलसिला चल रहा यदि इन संस्थानों के पास निर्धारित योग्यता वैध पंजीकरण नहीं तो वे खुलेआम मरीजों का इलाज कैसे.जब  कोई गंभीर घटना सामने नहीं आती तब तक ऐसे कथित अस्पतालों पर कार्रवाई दिखाई नहीं देती सवाल यह किसी मरीज की जान जाने या गंभीर नुकसान होने के बाद ही प्रशासन कार्रवाई करेगा यदि समय रहते जांच हो जाए तो संभावित हादसे को टाला जा सकता जिले से लेकर सभी तहसीलों में अस्पतालों की भरमार हो गई यहां तक बिना अनुभव के डॉक्टर से इलाज कराया जा रहा है
 
मरीजों की मौत होने के बाद प्रशासन जगाता है हफ्ते दो हफ्ते बंद करवा कर फिर चालू करवा देता हॉस्पिटल को कहीं ना कहीं सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं सी एम ओ बस्ती द्वारा तमाम में से अस्पताल संचालित हो रहे हैं जान तो ना प्रशिक्षित डॉक्टर हैं और ना ही प्रशिक्षित महिला डॉक्टर है लेकिन अस्पताल पर घूम रहे अस्पतालों के दलाल झांसी में लेकर के अपने प्राइवेट अस्पताल पर भर्ती करवा कर करते हैं मोटी रकम की वसूली और जब मरीज मर जाएगा उसके बाद पल्ला झाड़ करके किनारे खड़े हो जाते हैं स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन अस्पतालों पर जांच करके कार्रवाई की जाना अति आवश्यक है
 
नहीं जाने वाले समय में मरीजों की मौत अस्पतालों में ज्यादा हो रही है लोग इलाज के अभाव में प्राइवेट का रास्ता अपनाते हैं जबकि सरकार द्वारा दी जा रही इतनी फैसिलिटी सरकारी हॉस्पिटलों में फिर भी इलाज न होने के कारण प्राइवेट में जाना पड़ता है इसके कारण अपरिचित डॉक्टर द्वारा इलाज किया जाता है जिससे डिलीवरी में हो रही मौसम का कारण अस्पर नजर आ रहा है.
 
हरैया कस्बे में संचालित सभी निजी अस्पतालों चिकित्सा केंद्रों का अचानक स्थलीय निरीक्षण कराया जाए अस्पताल का पंजीकरण चिकित्सक की डिग्री व पंजीकरण पैरामेडिकल स्टाफ की योग्यता प्रसव संबंधी सुविधाएं दवाओं का रखरखाव अग्निशमन व्यवस्था स्वच्छता तथा अन्य अनिवार्य मानकों जांच केवल कागजों में औपचारिक जांच करने के बजाय वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को धरातल उतरना.जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठ रहे काई सवाल शिकायतों के बावजूद ऐसे संस्थानों की जांच नहीं हो रही यह भी जांच का विषय है कि आखिर निगरानी तंत्र की जिम्मेदारी कौन निभा रहा कस्बे में लंबे समय से संचालित किसी संस्थान की वैधता व्यवस्थाओं की जानकारी विभाग को नहीं  तो यह स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल

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