नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती पर उठे सवाल
कार्य परिषद के सदस्यों ने चयन प्रक्रिया पर जताई थी आपत्ति, न्याय विभाग ने भर्ती से जुड़े अभिलेख तलब किए
स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो। प्रयागराज में वर्ष 2023 में शुरू हुई डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। चयन प्रक्रिया पर विश्वविद्यालय की कार्य परिषद के कुछ सदस्यों ने आपत्ति जताई थी। इसके बावजूद कुलपति की ओर से उसी दिन परिणाम जारी किए जाने और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की बात सामने आई है।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आने के बाद प्रदेश सरकार के न्याय विभाग ने दो अगस्त को कुलपति से चयन से संबंधित सभी अभिलेख तलब किए हैं। फिलहाल विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए अभिलेखों और कुलपति के जवाब का परीक्षण किया जा रहा है। अब तक इस मामले में कोई नया निर्देश जारी नहीं हुआ है।
इसी बीच कुछ लोगों ने भर्ती प्रक्रिया में कथित धांधली और पक्षपात का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुलपति के तीन पूर्व शिष्यों का भी असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयन किया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
2023 में हुई थी विश्वविद्यालय की स्थापना
प्रयागराज में युवाओं को कानून की उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2023 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई थी। दिल्ली विश्वविद्यालय की वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. उषा टंडन को इसका पहला कुलपति नियुक्त किया गया था।
विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर अभी निर्माणाधीन है। झलवा में परिसर का निर्माण कार्य चल रहा है। फिलहाल पढ़ाई के संचालन के लिए फाफामऊ स्थित बीबीएस कॉलेज परिसर को किराये पर लेकर कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
विश्वविद्यालय में बीए एलएलबी पाठ्यक्रम की 60 सीटें स्वीकृत हैं और प्रवेश प्रक्रिया वर्ष 2024 से शुरू हुई। इसी वर्ष पहले चरण में छह असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती की गई थी। इसके बाद जुलाई में 12 और असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती की गई, जिसे लेकर अब विवाद सामने आया है।


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