सुप्रीम कोर्ट ने NTA की क्षमता पर उठाए सवाल, UPSC जैसी वैज्ञानिक रूप से सुसज्जित संस्था की जरूरत बताई

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संवाददाता सचिन बाजपेई 
 
 
नई दिल्ली, : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और क्षमता पर गंभीर सवाल उठाए। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए UPSC जैसी समर्पित और वैज्ञानिक रूप से सुसज्जित संस्था की जरूरत है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन सप्ताह में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
 
यह सुनवाई फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) की याचिकाओं पर हुई। याचिकाओं में NEET-UG 2026 पेपर लीक के बाद NTA में संरचनात्मक सुधार की मांग की गई है। मई 2026 में आयोजित NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी।
 
 सुरक्षा व्यवस्था पर सॉलिसिटर जनरल का बयान
 
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को NTA की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि प्रश्न पत्र तैयार करने में कई मॉडरेटर शामिल होते हैं। चार सेट प्रश्न पत्र बनाए जाते हैं, जिनमें से दो चुने जाते हैं। प्रिंटिंग प्रेस पर सीसीटीवी और CISF सुरक्षा होती है। प्रश्न पत्र विशेष सुरक्षित कंटेनरों में GPS ट्रैकिंग वाले वाहनों से ले जाए जाते हैं। स्टोर रूम में वीडियोग्राफी होती है और परीक्षा के दिन छात्रों की उपस्थिति में सील खोली जाती है। मेहता ने इसे “फूलप्रूफ” बताया, लेकिन मानव हस्तक्षेप से गलती की संभावना स्वीकार की।
 
 कोर्ट का रुख: सिर्फ प्रक्रियाएं पर्याप्त नहीं
 
जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि ये सुरक्षा उपाय राधाकृष्णन समिति के दायरे में पहले से थे। कोर्ट का मुख्य मुद्दा सिर्फ एक परीक्षा की सुरक्षा नहीं, बल्कि सुधारों को स्थायी संस्थागत ढांचे में बदलना है। उन्होंने कहा, “ये अखंडता के मुद्दे हमारे देखने के नहीं हैं। आपको इन्हें एक वैज्ञानिक रूप से सुसज्जित और समर्पित संस्था को सौंपना होगा।”
 
कोर्ट ने UPSC का उदाहरण दिया। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि UPSC ने वर्षों से परीक्षाएं आयोजित करके संस्थागत स्मृति और विशेषज्ञता विकसित की है। NTA को भी इसी तरह निरंतर अपग्रेड होकर एक जीवंत संस्था बनना चाहिए। उन्होंने कर्मियों के प्रशिक्षण, शिकायत निवारण तंत्र, भौतिक और बौद्धिक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।
 
नियुक्तियों और बुनियादी ढांचे पर सवाल
कोर्ट ने पूछा कि प्रस्तावित पदों (डायरेक्टर जनरल, अतिरिक्त/जॉइंट सेक्रेटरी स्तर, आईटी डायरेक्टर आदि) पर कितनी नियुक्तियां हुईं? क्या उन्होंने चार्ज लिया? क्या अलग परिसर है? डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए फुल-टाइम अधिकारी नियुक्त हुए या नहीं? समिति ने 16 वर्टिकल्स (टेस्टिंग सेंटर्स, साइबर सिक्योरिटी, कैंडिडेट एक्सपीरियंस आदि) बनाने की सिफारिश की थी। कोर्ट ने पूछा कि इनके लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर और मैनपावर बनाया गया या नहीं।
 
मेहता ने जवाब दिया कि विज्ञापन जारी हो चुके हैं और सरकार भर्ती प्रक्रिया में है। उन्होंने कहा कि राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें “पूर्ण रूप से” स्वीकार कर ली गई हैं। कुछ लागू हो चुकी हैं और बाकी पर प्रगति बताई जाएगी। NTA NIC के सहयोग से टेक्नोलॉजी टीम बना रहा है और स्वदेशी एआई मॉडल पर काम कर रहा है। प्रश्न पत्रों का अनुवाद फिलहाल मैन्युअल रूप से 13 भाषाओं में होता है।
 
 कोर्ट का आदेश
कोर्ट ने शिक्षा सचिव को निर्देश दिया कि राधाकृष्णन समिति (पूर्व ISRO प्रमुख के. राधाकृष्णन) की सिफारिशों (नंदन नीलेकणि समिति द्वारा सुधारी गई) पर उठाए गए कदमों और समय-सीमा का विस्तृत हलफनामा तीन सप्ताह में दाखिल करें। कोर्ट ने कहा कि संस्थागत स्मृति व्यक्तियों पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। अनुभवी लोग ट्रांसफर हो जाते हैं तो अनुभव चला जाता है। इसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
 
पृष्ठभूमि
NEET-UG 2026 (3 मई) में पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द हुई। इससे पहले 2024 में भी लीक विवाद हुआ था। राधाकृष्णन समिति ने डेटा सिक्योरिटी, NTA के पुनर्गठन, कंप्यूटर आधारित परीक्षा और स्थायी स्टाफ बढ़ाने जैसी सिफारिशें की थीं। याचिकाकर्ता NTA को अधिक मजबूत, प्रौद्योगिकीय रूप से उन्नत और स्वायत्त संस्था से बदलने या मौलिक रूप से पुनर्गठित करने की मांग कर रहे हैं।
 
कोर्ट की टिप्पणियां परीक्षा प्रणाली में स्थायी सुधारों की जरूरत को रेखांकित करती हैं, ताकि लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो।

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