उर्वरक वितरण में लापरवाही मिली तो होगी कार्रवाई : मुख्य सचिव
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत-बचाव कार्यों की जिलाधिकारी प्रतिदिन करें समीक्षा, शून्य व कम भंडार वाली समितियों में तत्काल आपूर्ति के निर्देश
लखनऊ, 13 अगस्त।
मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई। बैठक में खरीफ सीजन में उर्वरक की उपलब्धता एवं वितरण, आर्द्रभूमि अधिसूचना, रामसर स्थलों तथा प्रदेश में बाढ़ की स्थिति और राहत-बचाव कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
समितियों और वितरण केंद्रों पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश
खरीफ सीजन में उर्वरक की उपलब्धता एवं वितरण की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि सभी समितियों और वितरण केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध रहना चाहिए। जिन समितियों में उर्वरक का भंडार शून्य या बहुत कम है, उनकी विशेष निगरानी करते हुए तत्काल आवश्यक आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में अपर जिलाधिकारी या मुख्य विकास अधिकारी से कम स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी नामित किया जाए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को उर्वरक प्राप्त करने में परेशानी न हो, इसके लिए जरूरत पड़ने पर उन्हें नजदीकी समिति से संबद्ध करने की वैकल्पिक व्यवस्था भी की जाए।
मुख्य सचिव ने मुख्य विकास अधिकारियों को प्रतिदिन तथा जिलाधिकारियों को साप्ताहिक स्तर पर उर्वरक की उपलब्धता और वितरण की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि उर्वरक की अधिक कीमत वसूलने या अनधिकृत रूप से किसी अन्य वस्तु के साथ जोड़कर बिक्री करने संबंधी शिकायत किसी भी स्थिति में नहीं मिलनी चाहिए।
वेटलैंड प्रस्ताव जल्द भेजने के निर्देश
बैठक में आर्द्रभूमि यानी वेटलैंड को अधिसूचित किए जाने की प्रगति की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि झांसी, गौतमबुद्ध नगर, गोंडा और बलिया से अभी तक कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है। इस पर मुख्य सचिव ने संबंधित जिलाधिकारियों को जिला स्तरीय आर्द्रभूमि समिति की बैठक तत्काल आयोजित करने तथा प्रस्ताव इसी माह के अंत तक विभाग को भेजने के निर्देश दिए।
उन्होंने रामसर स्थलों के लिए पात्र स्थानों के प्रस्ताव भी शीघ्र भेजने को कहा। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 26 जिलों में अब तक कुल 101 आर्द्रभूमियां अधिसूचित की जा चुकी हैं, जबकि 45 जिलों से 53 नए प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
प्रदेश में 13 रामसर स्थल अधिसूचित
बैठक में प्रदेश में अधिसूचित रामसर स्थलों की भी जानकारी दी गई। प्रदेश में अब तक 13 रामसर स्थल अधिसूचित किए जा चुके हैं। इनमें बुलंदशहर का अपर गंगा रिवर, इटावा की सरसई नावर झील, उन्नाव का नवाबगंज पक्षी विहार, हरदोई का साण्डी पक्षी विहार, रायबरेली का समसपुर पक्षी विहार, गोंडा का पार्वती अरगा पक्षी विहार, मैनपुरी का समान पक्षी विहार, आगरा का सूरसरोवर पक्षी विहार, मुजफ्फरनगर का हैदरपुर वेटलैंड, संतकबीरनगर का बखीरा पक्षी विहार, एटा का पटना पक्षी विहार, अलीगढ़ की शेखा झील तथा बलिया का सुरहाताल शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त आठ अन्य रामसर स्थलों के प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे जा चुके हैं। मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को पात्र स्थलों के प्रस्तावों की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रतिदिन निगरानी के निर्देश
मुख्य सचिव ने प्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ की स्थिति पर प्रतिदिन नजर रखी जाए और प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए रखी जाए। प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने तथा राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरतने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को समय से चिकित्सा सुविधा, खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए। प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक एवं राहत दल सक्रिय रहें और आवश्यकता के अनुसार तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि बाढ़ की स्थिति में प्रशासन की तत्परता और संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण है। प्रभावित लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए जिलाधिकारी स्वयं राहत एवं बचाव कार्यों की नियमित समीक्षा करें।
बैठक में प्रमुख सचिव कृषि रविन्द्र, प्रमुख सचिव राजस्व अपर्णा यू., प्रमुख सचिव वन वी. हेकाली झिमोमी, प्रमुख सचिव सहकारिता अजय कुमार शुक्ला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


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