एफसीआरए और परिसीमन विधेयक पर अखिलेश का सरकार पर हमला

बोले- संस्थाओं पर कब्जे और अल्पसंख्यकों को परेशान करने की दिशा में बढ़ रही सरकार, विपक्ष के सवालों का जवाब देने से बच रही भाजपा

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नई दिल्ली।

 समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर एफसीआरए विधेयक और परिसीमन विधेयक को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी दोनों विधेयकों का विरोध कर रही है। उनका आरोप है कि सरकार एफसीआरए के माध्यम से ऐसी संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है, जो विदेश से प्राप्त धन के माध्यम से सामाजिक और जनहित के कार्य संचालित करती हैं।

सोमवार को संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार एफसीआरए विधेयक के माध्यम से संस्थाओं को डराने का काम कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन संस्थाओं को अच्छे कार्यों के संचालन के लिए विदेश से आर्थिक सहायता मिलती है, उन्हें सरकार के दबाव का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस कानून के माध्यम से संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

‘संस्थाओं पर कब्जे की कोशिश कर रही सरकार’

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में कई संस्थाएं अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं और उनमें से कुछ पर राजनीतिक प्रभाव के जरिए कब्जा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के एक बड़े शहर में भाजपा के एक मंत्री द्वारा एक संस्था पर कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है।

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उन्होंने भाजपा पर भूमाफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर जमीनों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं। उनके मुताबिक, जहां भी खाली जमीन या तालाब दिखाई देता है, वहां कब्जा करने की कोशिश की जाती है।

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अखिलेश यादव ने अयोध्या का उल्लेख करते हुए भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या जैसी धार्मिक आस्था से जुड़ी भूमि पर भी जमीनों की खरीद-फरोख्त में बड़े पैमाने पर खेल हुआ है। उन्होंने दावा किया कि कुछ जमीनों के दाम कम समय में कई गुना बढ़ाकर बेचे गए। हालांकि इन आरोपों पर भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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‘विदेशी धन पर रोक, देश का पैसा बाहर जाने पर क्या कार्रवाई?’

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने सत्ता में आने से पहले देश से बाहर गया काला धन वापस लाने और देश का पैसा लेकर भागने वालों के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया था।

अखिलेश यादव ने कहा कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें लोग बैंकों का पैसा लेकर देश से बाहर चले गए। उन्होंने सवाल किया कि सरकार ने ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई की और देश का पैसा बाहर जाने से रोकने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए गए।एफसीआरए और परिसीमन विधेयक पर अखिलेश का सरकार पर हमला

उन्होंने कहा कि यदि सरकार विदेश से भारत में आने वाले धन पर नियंत्रण और पाबंदी की बात करती है तो उसे भारत से बाहर जाने वाले धन को लेकर भी स्पष्ट नीति बतानी चाहिए। उन्होंने भाजपा सरकार को उसके पुराने चुनावी नारों की याद दिलाते हुए कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि देश का पैसा लेकर विदेश भागने वालों के खिलाफ अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में ‘पैसे वालों के अच्छे दिन’ आए हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि कानूनी अथवा गैर-कानूनी तरीके से देश से बाहर जाने वाले धन पर प्रभावी रोक कब लगेगी।

‘लोकतंत्र में विपक्ष का काम सवाल पूछना’

सपा अध्यक्ष ने सरकार पर विपक्ष के सवालों से बचने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनकर संसद में भेजती है और विपक्ष का प्रमुख दायित्व सरकार से सवाल पूछना तथा जनता से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाना है।

अखिलेश यादव ने कहा कि मौजूदा सरकार सवालों का जवाब देने से बच रही है। उन्होंने छात्रों और युवाओं से जुड़े आंदोलनों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि दिल्ली में छात्रों और नौजवानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, लाठीचार्ज किया गया और कई लोगों को चोटें आईं।

उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में छात्र अस्पताल में भर्ती हुए। प्रयागराज का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी बच्चों और युवाओं पर मुकदमे दर्ज किए गए। उनके अनुसार, कुछ ऐसे बच्चों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए गए जो आंदोलन में शामिल नहीं थे।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार की ओर से पहले यह आश्वासन दिया गया था कि आंदोलन में शामिल लोगों पर मुकदमे नहीं किए जाएंगे और किसी को परेशान नहीं किया जाएगा, लेकिन बाद में सरकार अपने वादे से पीछे हट गई। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में जनता और विपक्ष अपने सवालों के जवाब किससे मांगे।

परिसीमन विधेयक पर भी सरकार को घेरा

अखिलेश यादव ने परिसीमन विधेयक को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार परिसीमन विधेयक के माध्यम से निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव करना चाहती है, लेकिन उसे देश की वास्तविक सीमाओं और क्षेत्रफल को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि वर्ष 2014 में देश का क्षेत्रफल और सीमाएं क्या थीं और वर्तमान में स्थिति क्या है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को बदलने की बात कर रही है, लेकिन देश की सीमाओं की सुरक्षा और स्थिति पर स्पष्ट जवाब नहीं दे रही।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा एक गंभीर राष्ट्रीय विषय है और सरकार को इस पर देश के सामने पूरी जानकारी रखनी चाहिए।

ममता बनर्जी पर हमले को बताया दुखद

अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ कथित हमले की घटना पर भी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने इसे बेहद दुखद और निंदनीय बताया।

उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हैं। यदि किसी सरकार की ओर से उनके खिलाफ हमला कराया जा रहा है तो यह गंभीर और निंदनीय विषय है। उन्होंने कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन किसी वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

विपक्ष के तेवर से संसद में बढ़ सकती है राजनीतिक गर्मी

अखिलेश यादव के इन बयानों से साफ है कि समाजवादी पार्टी आगामी राजनीतिक मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर हमलावर रुख अपनाए हुए है। एफसीआरए विधेयक, परिसीमन, छात्रों से जुड़े आंदोलन, देश से बाहर जाने वाले धन और संस्थाओं पर कथित नियंत्रण जैसे मुद्दों को लेकर सपा सरकार को घेरने की तैयारी में है।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार और भाजपा की ओर से इन आरोपों पर क्या जवाब दिया जाता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। संसद में विधेयकों और नीतिगत फैसलों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस आने वाले दिनों में और तेज होने के आसार हैं।

अखिलेश यादव के बयानों से यह भी संकेत मिलता है कि समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश से जुड़े सवालों को भी संसद में प्रमुखता से उठाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। परिसीमन का मुद्दा विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भविष्य में निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन का असर राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।

फिलहाल, एफसीआरए विधेयक और परिसीमन विधेयक को लेकर विपक्ष की आपत्तियों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

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