लगातार हो रही अघोषित विद्युत कटौती से उपभोक्ताओं को हो रही भारी परेशानी

ग्रामीणों को उमस भरी गर्मी में रातभर बिजली के इंतजार में परेशान होना पड़ा

Swatantra Prabhat UP Picture
Published On

चंदापुर/रायबरेली: उमस भरी गर्मी के बीच लगातार हो रही अघोषित विद्युत कटौती और बढ़ते विद्युत लोड ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था की पोल खोल दी है। आए दिन लाइनों में फाल्ट और घंटों होने वाली 33 केवी रोस्टिंग के चलते उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बुधवार रात मऊ शर्की गांव में ट्रांसफार्मर के समीप लगे कनेक्शन बॉक्स में स्पार्किंग के बाद आग लगने से बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। इससे करीब एक हजार की आबादी प्रभावित रही और ग्रामीणों को उमस भरी गर्मी में रातभर बिजली के इंतजार में परेशान होना पड़ा।
 
आपको बता दें कि, जानकारी के अनुसार बुधवार रात करीब 10 बजे मऊ शर्की गांव में ट्रांसफार्मर के बगल में लगे कनेक्शन बॉक्स में अचानक स्पार्किंग हुई और आग लग गई। सूचना मिलते ही विभागीय कर्मचारी मौके पर पहुंचे और फाल्ट दुरुस्त करने का प्रयास किया, लेकिन घना अंधेरा होने के कारण रात में मरम्मत कार्य पूरा नहीं हो सका। सुरक्षा की दृष्टि से संबंधित लाइन को डिस्कनेक्ट कर अन्य लाइनों को चालू किया गया। इसके बाद करीब रात 12 बजे चंदापुर फीडर से जुड़े उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति बहाल हो सकी।
 
सुबह विभागीय लाइनमैन चंद्रभान और विजय कुमार ने मौके पर पहुंचकर विद्युत लीड को बदलने का कार्य किया और फाल्ट को दुरुस्त किया। इसके बाद ग्रामीणों को राहत मिली। हालांकि, रातभर बिजली गुल रहने के कारण उमस और मच्छरों से परेशान ग्रामीणों ने किसी तरह हाथ के पंखे के सहारे रात गुजारी।
 
33 केवी रोस्टिंग और फाल्ट ने बढ़ाई परेशानी: क्षेत्रीय उपभोक्ताओं का कहना है कि, एक ओर गर्मी और उमस लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर बिजली कटौती का कोई निर्धारित समय नहीं रह गया है। प्रतिदिन 33 केवी की रोस्टिंग कई बार तो दो से चार घंटे तक होने के कारण घरेलू उपभोक्ताओं के साथ ही छोटे कारोबारियों और किसानों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बढ़ रहे विद्युत लोड के बीच फाल्ट की घटनाओं ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।
 
मऊ शर्की निवासी अमरेश प्रताप, वीरेंद्र कुमार और बजरंगी तथा मुरैनी निवासी रणविजय सिंह और कल्पेश शुक्ला ने विद्युत विभाग से लाइनों के समयबद्ध मेंटीनेंस, ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने, जर्जर विद्युत लाइनों को बदलने और आवश्यक मरम्मत कार्य कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि, बारिश और उमस भरी गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने के बावजूद यदि विद्युत ढांचे को उसी अनुपात में मजबूत नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में समस्या और विकराल हो सकती है।
 
‘बिजली कब आएगी और कब जाएगी, पता ही नहीं’: ग्रामीणों का आरोप है कि, क्षेत्र में बिजली आपूर्ति का कोई स्पष्ट शेड्यूल दिखाई नहीं देता। कब बिजली आएगी और कब चली जाएगी, इसका उपभोक्ताओं को पहले से पता नहीं रहता। अचानक होने वाली कटौती और फाल्ट के कारण घरेलू कामकाज से लेकर पेयजल आपूर्ति तक प्रभावित होती है। कुछ ग्रामीणों ने विद्युत अव्यवस्था को लेकर राजनीतिक नाराजगी भी जताई। उनका कहना है कि, क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं को लेकर जनता को लगातार परेशानी उठानी पड़ रही है। हालांकि, राजनीतिक आरोपों पर विभागीय स्तर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
 
मेंटीनेंस और क्षमता वृद्धि की उठी मांग: उपभोक्ताओं का कहना है कि, बढ़ते विद्युत लोड को देखते हुए विभाग को पहले से तैयारी करनी चाहिए। ट्रांसफार्मरों की क्षमता की समीक्षा, जर्जर तारों और विद्युत उपकरणों का रखरखाव तथा संवेदनशील स्थानों पर समय रहते मरम्मत होने से फाल्ट और आग जैसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
 
ग्रामीणों ने शासन और विद्युत विभाग के अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्र में निर्बाध एवं निर्धारित शेड्यूल के अनुसार विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि, गर्मी के इस दौर में बिजली महज सुविधा नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जरूरत बन चुकी है। ऐसे में लगातार होने वाली कटौती और फाल्ट से जनता को राहत दिलाना विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए।

About The Author

Post Comments

Comments