चंपतराय की मुश्किलें: मंदिर से ट्रस्ट तक, हर मोर्चे पर चुनौती
अयोध्या में बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों समेत सभी वकीलों ने कल एक जुलूस निकाला और चंपतराय पर एफआईआर की मांग की। वकीलों का कहना है कि चढ़ावा चोरी में छोटी मछलियों को तो जाल में फांस लिया गया है लेकिन चंपतराय जो इस केस का अहम हिस्सा हैं उनके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं की गई। वकीलों का कहना है कि चंपतराय को बचाने की कोशिश की जा रही है जब कि मुख्य आरोपी चंपतराय ही हैं।
उधर अयोध्या के वकीलों ने एक स्वर में कहा है कि राम मंदिर चंदा चोरी के जितने भी आरोपी हैं उनका मुकदमा कोई भी वकील नहीं लड़ेगा। राम मंदिर आंदोलन का चेहरा, विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय।
राम मंदिर का शिलान्यास से लेकर प्राण प्रतिष्ठा तक, हर बड़ी तस्वीर में वो सबसे आगे दिखे। पर अयोध्या में रामलला का मंदिर बन जाने के बाद भी उनकी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। उल्टा, जिम्मेदारी बढ़ने के साथ चुनौतियां भी कई गुना हो गई हैं। ट्रस्ट का पारदर्शिता संकट: 'चंदे का हिसाब' सबसे बड़ा मुद्दा- राम मंदिर के लिए 2019 से 2021 के बीच देश-दुनिया से 3500 करोड़ रुपये से ज्यादा का चंदा इकट्ठा हुआ।
मुश्किल क्या है?- विपक्ष, कुछ साधु-संत और सोशल मीडिया लगातार ट्रस्ट से चंदे का पूरा ऑडिटेड हिसाब मांग रहा है। आरोप लगते रहे कि जमीन खरीद में 'ओवर प्राइसिंग', दान में अनियमितता हुई। 2021 में अयोध्या के ही संतों ने जमीन घोटाले के आरोप लगाकर FIR तक की मांग की थी।
चंपत राय ने बार-बार कहा कि सारा हिसाब CAG स्टाइल ऑडिट से होगा और वेबसाइट पर डाला जाएगा। पर 'कब' और 'कितना डिटेल' को लेकर सवाल आज भी पीछा नहीं छोड़ रहे। एक 3500 करोड़ के प्रोजेक्ट के महासचिव होने का मतलब है, हर पैसे का जवाब देना। यही उनका सबसे बड़ा प्रेशर पॉइंट है। निर्माण की गति vs भक्तों की उम्मीद: 'अधूरा मंदिर' की किरकिरी - 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा हुई। देश ने माना मंदिर बन गया। असलियत क्या है?- प्राण प्रतिष्ठा सिर्फ गर्भगृह और पहली मंजिल की हुई थी।
Read More किसान के बेटे ने बढ़ाया गोंडा का गौरव, अग्निवीर जीडी में चयनित होकर देश सेवा के लिए नागपुर रवानापूरा मंदिर परिसर, परकोटा, संग्रहालय, तीर्थ यात्री सुविधा केंद्र, पार्किंग अभी बन रहा है। ट्रस्ट का लक्ष्य 2025 के अंत तक मुख्य ढांचा पूरा करना है। मुश्किल: गर्मी में टाइल्स गर्म होना, बारिश में छत टपकने की खबरें, भीड़ प्रबंधन की अव्यवस्था।
हर छोटी कमी पर सीधा निशाना महासचिव चंपत राय पर आता है। भक्त 500 साल इंतजार के बाद 'परफेक्ट' मंदिर चाहते हैं। एक ईंट टेढ़ी दिखी तो ट्रोलिंग शुरू। निर्माण की टाइमलाइन और जनता की उम्मीद के बीच बैलेंस करना उनके लिए रोज की जंग है।
अयोध्या के स्थानीय संतों से तनातनी- राम मंदिर आंदोलन में कई अखाड़े, मठ और स्थानीय संत शामिल थे। मंदिर बनने के बाद 'क्रेडिट' और 'कंट्रोल' को लेकर खींचतान सामने आई। तपस्वी छावनी, हनुमानगढ़ी और अन्य अखाड़ों के कई संत खुलकर कह चुके हैं कि ट्रस्ट 'एकतरफा' चल रहा है, स्थानीय आवाजों को जगह नहीं मिल रही।
चंपत राय को दिल्ली-VHP बैकग्राउंड का 'बाहरी' बताकर भी हमले होते हैं। अयोध्या की धर्म सत्ता को साधना, बिना टकराव के सबको साथ लेकर चलना, ये राजनीतिक कुशलता से भी बड़ी चुनौती है। भीड़, वीआईपी कल्चर और आम भक्त का गुस्सा- प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या रोज 1-1.5 लाख श्रद्धालु देख रही है। दर्शन के लिए 6-8 घंटे की लाइन, वीआईपी पास का आरोप, टूट-फूट, सफाई।
जब कोई बुजुर्ग महिला लाइन में बेहोश होती है, तो वीडियो वायरल होता है और कैप्शन होता है: "ये है चंपत राय का प्रबंधन"। ट्रस्ट का काम मंदिर बनाना है, पर भीड़ का गुस्सा प्रशासन के साथ-साथ ट्रस्ट के महासचिव पर भी गिरता है।
क्योंकि अब रामलला - चंपत राय का चेहरा बन चुका है।राजनीतिक निशाने पर- 2024 लोकसभा में भाजपा अयोध्या सीट हार गई। ये ट्रस्ट और VHP के लिए झटका था। विपक्ष का नैरेटिव बना: "मंदिर दे दिया, पर रोजगार, महंगाई, अव्यवस्था नहीं दी।" इस हार का ठीकरा भी अप्रत्यक्ष रूप से मंदिर प्रबंधन और चंपत राय पर फूटा। अब हर चुनाव में अयोध्या का मॉडल सवालों में रहेगा। मंदिर बन गया, इम्तिहान शुरू हुआ- चंपत राय ने अपना जीवन राम मंदिर को समर्पित किया। 80+ की उम्र में भी वो रोज 16 घंटे काम करते हैं। पर आंदोलन का नेता होना आसान था, 500 साल के सपने का CEO होना सबसे कठिन है। अब लड़ाई कोर्ट में नहीं, कॉरिडोर में है। हिसाब, पारदर्शिता, निर्माण की गुणवत्ता, संतों को साधना और करोड़ों भक्तों की उम्मीद। जब तक अंतिम शिखर नहीं लग जाता और अयोध्या वर्ल्ड-क्लास तीर्थ नहीं बन जाती, तब तक उनकी मुश्किलें कम नहीं होंगी। राम मंदिर बनाकर उन्होंने इतिहास रच दिया। अब उस इतिहास को कलंक-मुक्त रखना ही उनकी सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है।


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