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सुपौल में स्वास्थ्य विभाग का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल
त्रिवेणीगंज समेत 5 प्रमुख सरकारी अस्पतालों के बदले गए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी
सुपौल जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (CMO) डॉ बी एस झा ने जिले के पांच प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों/उपाधीक्षकों की नियुक्ति संबंधी आदेश जारी किया है। सीएमओ द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न पत्रों एवं निर्देशों के आलोक में स्वास्थ्य संस्थानों में बिहार स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के वरीयतम चिकित्सा पदाधिकारी को ही प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी/उपाधीक्षक तथा निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDO) बनाया जाना है। इसी के तहत बिहार कोषागार संहिता-2011 के नियम-84 के अंतर्गत संबंधित पदाधिकारियों को वित्तीय शक्तियां भी प्रदान की गई हैं।
# इन अस्पतालों में हुआ है बदलाव :
🔹 पीएचसी किशनपुर में कार्यरत डॉ अभिषेक कुमार सिन्हा का स्थानांतरण कर उनकी जगह डॉ अखिलेश कुमार को नया प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी बनाया गया है।
🔹 अनुमंडलीय अस्पताल निर्मली में प्रभारी रहे डॉ शैलेंद्र कुमार का स्थानांतरण कर उनकी जगह विशेषज्ञ चिकित्सक (जनरल फिजिशियन) डॉ रविंद्र कुमार रवि को नया प्रभारी उपाधीक्षक नियुक्त किया गया है।
🔹 रेफरल अस्पताल राघोपुर में कार्यरत डॉ दीपनारायण राम के स्थान पर डॉ राजेंद्र गुप्ता को नया प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी बनाया गया है।
🔹 पीएचसी निर्मली में डॉ अरफा जबीं को नया प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी नियुक्त किया गया है।
🔹 अनुमंडलीय अस्पताल त्रिवेणीगंज के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ इंद्रदेव यादव के 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त होने के बाद वरीयता के आधार पर डॉ उमेश कुमार को नया प्रभारी उपाधीक्षक-सह-निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है।
# कब से लागू होगा आदेश :
सीएमओ ने निर्देश दिया है कि अनुमंडलीय अस्पताल निर्मली एवं त्रिवेणीगंज के वर्तमान प्रभारी उपाधीक्षक तत्काल प्रभाव से अपने-अपने संस्थान का संपूर्ण वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रभार नव-नामित अधिकारियों को सौंप दें। त्रिवेणीगंज अनुमंडलीय अस्पताल में नए प्रभारी उपाधीक्षक की नियुक्ति 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी,जबकि शेष सभी नियुक्तियां 7 जुलाई 2026 से लागू होंगी।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस प्रशासनिक बदलाव से जिले के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन,प्रशासनिक व्यवस्था और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में और अधिक सुधार होगा।


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