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उ.प्र. में भाजपा का नया संगठन: 'मिशन 2027' की तैयारी तेज
क्षेत्रीय संतुलन: पूर्वांचल के बाद अब पश्चिम यूपी, बुंदेलखंड, अवध, ब्रज को ज्यादा प्रतिनिधित्व।
राजीव शुक्ला (संपादक )
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से करीब 8 महीने पहले उत्तर प्रदेश भाजपा में सबसे बड़ा संगठनात्मक बदलाव दस्तक दे रहा है। दिसंबर 2025 में पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद अब पार्टी 'टीम यूपी 2.0' को अंतिम रूप देने में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक यह बदलाव सिर्फ फेरबदल नहीं, बल्कि 2027 की 'वार रूम टीम' है।
50% तक नए चेहरे को तबज्जों दी गई हैं और यह'एंटी-इंकबेंसी' काटने की तैयारी है। बीजेपी हाईकमान ने साफ कर दिया है कि नई टीम में करीब 50% बदलाव होंगे। इसका मकसद है- नए चेहरे, नया जोश: लंबे समय से एक ही पद पर जमे लोगों को हटाकर युवा और बूथ लेवल तक पकड़ रखने वालों को मौका। दोहरी जिम्मेदारी खत्म: कई पदाधिकारियों के पास संगठन + सरकार दोनों का चार्ज है। अब इसे खत्म किया जाएगा। 2024 का सबक: लोकसभा चुनाव में यूपी में सीटें घटने के बाद पार्टी अब PDA के जवाब में OBC-युवा आउटरीच पर फोकस कर रही है। सभी 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष बदले
यूपी को भाजपा ने 6 क्षेत्रों में बांटा है: काशी, अवध, गोरखपुर, कानपुर, ब्रज, बुंदेलखंड। भाजपा ने सभी 6 क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदल दिया है । नए अध्यक्ष अपनी टीम खुद बनाएंगे। जाति-क्षेत्र का फॉर्मूला:
पश्चिम: गुर्जर-वैश्य को तवज्जो, अवध: ब्राह्मण नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति। ब्रज में शाक्य या लोध समाज से बड़ा चेहरा। काशी में OBC, खासकर पटेल/कुर्मी प्रतिनिधित्व। प्रदेश कार्यकारिणी में बड़ा कट- वर्तमान में प्रदेश टीम में 7 महामंत्री, 18 उपाध्यक्ष, 16 सचिव हैं। क्या बदलेगा: महामंत्री 7 से 6 होंगे। यूपी की विशालता को देखते हुए ढांचा तो वही रहेगा, लेकिन पद कम होंगे। युवा + महिला: टीम में एक तिहाई महिलाओं को प्रतिनिधित्व। उम्र पर खास ध्यान। 7 मोर्चों के नए अध्यक्ष: युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, किसान, ओबीसी, SC, ST, अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष भी जल्द घोषित होंगे। 'मंत्रिमंडल के बाद संगठन' मॉडल- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल में कैबिनेट विस्तार किया। अब उसी तर्ज पर संगठन में बदलाव हो रहा है। संतुलन का खेल: जिन क्षेत्रों से मंत्री ज्यादा हैं, वहां संगठन में पद कम होंगे ताकि असंतुलन न रहे। ब्रज: 12 मंत्री हैं, इसलिए संगठन में भागीदारी कम हो सकती है
गोरखपुर: कैबिनेट में विस्तार नहीं मिला, तो प्रदेश इकाई में ज्यादा चेहरे मिल सकते हैं। PDA vs भाजपा का नया फॉर्मूला। 2027 चुनाव के लिए भाजपा की रणनीति 3 पिलर पर है। PDA का मुकाबला*: गैर-यादव OBC जैसे कुर्मी, लोध, मौर्य, सैनी, निषाद, राजभर को अहम जिम्मेदारी। पंकज चौधरी का कुर्मी बैकग्राउंड पूर्वांचल में OBC वोट साधेगा। बूथ मजबूती: सोशल मीडिया + जमीनी अभियान में सक्रिय, बूथ तक पकड़ वाले चेहरे।
क्षेत्रीय संतुलन: पूर्वांचल के बाद अब पश्चिम यूपी, बुंदेलखंड, अवध, ब्रज को ज्यादा प्रतिनिधित्व।
ये सिर्फ संगठन नहीं, बल्कि भाजपा का '2027 मॉडल' है। लक्ष्य साफ है - नए चेहरों, सामाजिक समीकरण और बूथ मैनेजमेंट के जरिए सपा के PDA को काटकर फिर से 2/3 बहुमत लाना।
अब देखना ये है कि 'परफॉर्मेंस' जीतता है या 'पैरवी'।


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