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बिजली कनेक्शन के लिए 50 हजार की रिश्वत मांगने का आरोप, ऊर्जा मंत्री ने दिए जांच के निर्देश
दोषी पाए जाने पर सहायक अभियंता के निलंबन की कार्रवाई होगी, जनसुनवाई में मंत्री ने सुनीं लोगों की समस्याएं
लखनऊ। बिजली कनेक्शन के नाम पर रिश्वत मांगने की शिकायत को नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच कराने तथा आरोप सही पाए जाने पर संबंधित सहायक अभियंता के निलंबन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि जनता का उत्पीड़न और सरकारी सेवाओं के बदले रिश्वत मांगने जैसी शिकायतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
गुरुवार को अपने आवास पर आयोजित जनसुनवाई के दौरान मंत्री ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान पेयजल, अतिक्रमण, विद्युत कनेक्शन, बिजली बिल में सुधार और नए विद्युत उपकेंद्रों की स्थापना से संबंधित शिकायतें सामने आईं। उन्होंने अधिकारियों को सभी शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
11 हजार के स्टीमेट के बाद भी नहीं मिला कनेक्शन
जनसुनवाई में लखनऊ निवासी विद्युत उपभोक्ता अभिनव त्रिपाठी ने घरेलू बिजली कनेक्शन नहीं मिलने की शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया कि फरवरी 2026 में तीन किलोवाट के घरेलू कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। विभाग की ओर से एक मार्च 2026 को जारी 11,622 रुपये का स्टीमेट भी जमा कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद कनेक्शन नहीं मिला।
उपभोक्ता का आरोप है कि बाद में संबंधित सहायक अभियंता शुभम सिंह ने कनेक्शन देने के एवज में 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। रिश्वत नहीं देने पर 12 अक्टूबर 2026 को करीब 2.24 लाख रुपये का नया स्टीमेट जारी कर दिया गया।
आरोप सही मिलने पर होगी कार्रवाई
शिकायत सुनने के बाद ऊर्जा मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आरोपों की निष्पक्षता से जांच की जाए और संबंधित अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालना और उनके कार्यों को जानबूझकर लंबित रखना गंभीर लापरवाही है।
मंत्री ने विद्युत कनेक्शन से जुड़े मामलों में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिकायत की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि लोगों को पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन का लाभ मिल सके।


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