संगम नगरी में 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा ढेड़िया उत्सव

शरद पूर्णिमा पर होने वाला यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और लोक संस्कृति का प्रतीक है। इसमें भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना होती है।

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स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज 
 
 
शरद पूर्णिमा पर होने वाला यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और लोक संस्कृति का प्रतीक है। इसमें भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना होती है।
 
यह पर्व प्रयागराज और आसपास के ग्रामीण इलाकों की पुरानी परंपरा है। बहनें मिट्टी से बने खास छिद्रयुक्त पात्र, जिसे ढेड़िया कहते हैं, में दीपक जलाती हैं। इन छिद्रों से दीपक की रोशनी आकर्षक दिखती है।
 
पर्व के दौरान महिलाएं और युवतियां लोकगीतों पर ढेड़िया लेकर लोकनृत्य करती हैं। कई जगह महिलाएं सिर या हाथों पर जलता ढेड़िया रखकर नाचती हैं। इसके बाद बहनें भाइयों की आरती उतारकर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं।
 
ढेड़िया पर्व सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि प्रयागराज की स्थानीय लोक संस्कृति और पारिवारिक रिश्तों को भी दर्शाता है। यह परंपरा सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रखती है।
 
 
 

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