चीनी मिलों की ऊर्जा खपत पर नजर
एनएसआई और बीईई के बीच हुआ समझौता
कानपुर। चीनी उद्योग में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, उत्पादन लागत कम करने और बिजली व भाप की खपत को नियंत्रित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआई), कानपुर और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। 16 अक्टूबर 2026 को हुए इस समझौते से देश की चीनी मिलों में ऊर्जा संरक्षण और सतत उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल शुरू होगी।
समझौते के तहत एनएसआई विभिन्न राज्यों की 200 से अधिक चीनी मिलों की ऊर्जा ऑडिट रिपोर्ट का अध्ययन और मूल्यांकन करेगा। इसके साथ ही चयनित चीनी मिलों का स्थलीय निरीक्षण कर ऊर्जा उपयोग, मशीनों की कार्यक्षमता और संयंत्रों के वास्तविक परिचालन की स्थिति का आकलन भी किया जाएगा।
अध्ययन में पेराई, बॉयलर संचालन, चीनी निर्माण की विभिन्न प्रक्रियाओं और सह-उत्पादन प्रणालियों में होने वाली ऊर्जा खपत पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके आधार पर भाप एवं बिजली की खपत को अनुकूलित करने, उपकरणों की कार्यक्षमता बढ़ाने और ऊर्जा संरक्षण के लिए तकनीकी व आर्थिक रूप से व्यावहारिक उपाय सुझाए जाएंगे।
समझौते पर बीईई के सचिव अरिजीत सेनगुप्ता तथा एनएसआई की निदेशक प्रो. सीमा परोहा ने अपने-अपने संस्थानों की ओर से हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर बीईई के संयुक्त निदेशक विवेक नेगी और एनएसआई के शर्करा अभियांत्रिकी विभाग के आचार्य डॉ. विनय कुमार भी उपस्थित रहे।
यह पहल चीनी मिलों में ऊर्जा बचत की संभावनाओं को पहचानने के साथ परिचालन लागत घटाने में मददगार साबित हो सकती है। ऊर्जा का बेहतर उपयोग होने से मिलों की उत्पादन क्षमता और आर्थिक दक्षता में सुधार की संभावना है। साथ ही, ऊर्जा संरक्षण के उपायों से पर्यावरणीय प्रभाव कम करने और अधिक टिकाऊ औद्योगिक उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा।
कानपुर स्थित राष्ट्रीय शर्करा संस्थान की तकनीकी विशेषज्ञता और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के सहयोग से होने वाला यह अध्ययन चीनी उद्योग की व्यावहारिक समस्याओं के समाधान तथा ऊर्जा प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


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