खामोशी ऐसी हो की कामयाबी शोर मचा दे

इफको ऑफिसर्स एसोसिएशन का चुनाव परिणाम

हर्षिता यादव  Picture
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ब्यूरो प्रयागराज । किसी चुनाव में अगर शोरगुल ना हो तो वह चुनाव कैसा। लेकिन बिना शोरगुल के केवल परिणाम  अप्रत्याशित हो जाए तो यह चुनाव का नायाब तरीका ही माना जाएगा। इसीलिए कहा गया है कि शोरगुल से अच्छा होता है ऐसी खमोशी  जो कामयाबी के बाद शोर मच जाए।
 
 यह चुनाव का सर्वोत्तम हथियार माना जाता है और इफको ऑफिसर एसोसिएशन के चुनाव में यही हुआ जहां पर चुनाव तक अजीब खामोशी थी लेकिन परिणाम ने शोर मचा दिया की नेतृत्व कर्ता की खामोशी में कितना दम था। 
 
अध्यक्ष का चुनाव दूसरी बार जीतने वाले अनुराग तिवारी जिनकी खमोशी ही उनका मुख्य चुनाव हथियार माना जाता है। ओर उसका विकल्प शायद इफको में लंबे अरसे से राजनीति करने वालों के पास भी आज तक नहीं हो पाया है । यही कारण है कि वह लगातार तीन बार कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष  और दो बार से इफको ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष का  लगातार चुनाव जीतरहे हैं।
 
 
 खामोशी की नीति को अंग्रेजी में साइलेंट इज द  बेस्ट पॉलिसी । तथा क्रिकेट की भाषा में गूगली कहा जाता है। जिसमें बड़े-बड़े बैट्समैन फस जाते हैं। इफको का परिणाम भी इसी गुगली और खामोशी वाली नीति का शिकार बड़े-बड़े दिग्गज हो गए। 
 
यही नहीं बड़े-बड़े दिग्गज 
 जो अपने को सूरमा कहते थे वह भी यहां आकर के रणनीति बनाने में जुटे लेकिन अनुराग तिवारी के गूगली में सब फस गए।चुनाव परिणाम आने के बाद श्री रविंद्र मिश्रा शास्त्री डॉ राकेश केसरवानी संदीप द्विवेदी पिंटू दुबे अनूप सुव्वा सिंह झाझरी गोपाल कृष्ण द्विवेदी राजा बाबू शमीम अहमद सिद्दीकी आदि नेताओं ने उनको दूसरी बार निर्वाचित होने पर तथा उनकी टीम को बधाई दी है।

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