भू-माफिया धंधेबाजो का नया ठिकाना बना कृष्ण का वृंदावन
यहाँ देश भर के बड़े बिजनेसमैन, बिल्डर और लैंड माफिया सक्रिय हो गए हैं।
मनोज कुमार अग्रवाल
द्वापर युग के इतिहास से जुड़ी धर्म नगरी वृंदावन में संतों और आस्था की आड़ में रियल एस्टेट और जमीन के सैकड़ों करोड़ों रुपये के खेल और भू-माफिया सिंडिकेट के मामले लगातार सामने आए हैं। धार्मिक पर्यटन और 'स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन' के रूप में ब्रज क्षेत्र के तेजी से हो रहे विकास के चलते, यहाँ देश भर के बड़े बिजनेसमैन, बिल्डर और लैंड माफिया सक्रिय हो गए हैं।
वृंदावन के जमीन विवादों और रियल एस्टेट से जुड़े फर्जीवाड़े के लिए अब योजनाबद्ध तरीके से संगठित सिंडिकेट लोगों को सोशल मीडिया पर व्यापक रील वायरल कर भ्रमजाल फैला कर आस्था श्रद्धा और विश्वास के साथ खेल रहे हैं। सोशल मीडिया पर बहुप्रसारित वायरल रील के जरिए संतों और आश्रमों के प्रति लोगों में आस्था का सैलाब उठाकर उसकी आड़ में जमीन का बड़ा कारोबार करने यमुना खादर और ग्रीन ज़ोन की जमीनों का सौदा किए जाने के गंभीर आरोप हैं।
आरोप यह भी है कि प्रॉपर्टी ग्रुप्स और बिल्डरों का एक बड़ा सिंडिकेट कुछ तथाकथित आध्यात्मिक चेहरों को भारी वित्तीय फंडिंग और ग्लोबल पब्लिसिटी देकर उनके प्रभाव का इस्तेमाल कर रहा है। इन सिंडिकेट्स पर यमुना खादर (यमुना के मैदानी इलाकों) की जमीनों को अवैध रूप से बेचने और असली संतों को वहां से हटाने के आरोप लगे हैं।
बताया जाता है कि इस काम को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया जाता है। हाई-प्रोफाइल पीआर का खेल कर भूमाफिया सिंडिकेट पर यह भी आरोप लगाया गया था कि वे स्थानीय आश्रमों और संतों के पास मशहूर हस्तियों और बड़े बिजनेसमैन को लाने के लिए करोड़ों रुपये तक खर्च करते हैं ताकि उस इलाके की प्रॉपर्टी की वैल्यू और साख को चमकाया जा सके।
ब्रजवास और आस्था के नाम पर बिल्डरों की ठगी का बड़ा खेल चल रहा है। यहां तक कि एक ही जमीन पर कई प्रोजेक्ट बना कर लोगों के साथ ठगी की जा रही है दिल्ली-एनसीआर और अन्य राज्यों के कई नामी बिल्डरों और भूमाफियाओं पर " ब्रज" और " वृंदावन" जैसे धार्मिक नामों का सहारा लेकर धोखाधड़ी करने के आरोप हैं।ये लोग खुद को भक्ति में समर्पित बता कर श्रीकृष्ण गोविन्द राधा आदि नाम के दुपट्टे और तिलक श्रृंगार धारण कर श्रद्धालुओं को विश्वास में लेकर उनके साथ धोखाधड़ी करते हैं।
मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की रोक के बावजूद कागजों में हेरफेर कर अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं।इतना ही नहीं फर्जी नक्शे और री-सेलिंग का खेल किया जाता है शुरुआती खरीदारों को एमडी वीए अप्रूवल और रेरा नंबर दिखाकर प्लॉट बेचे जाते हैं और रजिस्ट्री भी कर दी जाती है। लेकिन जमीन पर सालों तक न सड़क बनती है और न सीवर। आरोप है कि बाद में उसी रजिस्टर्ड जमीन का लेआउट बदलकर नए नामों से दूसरे लोगों को दोबारा बेच दिया जाता है।
आपको यह भी पता रहे कि वृंदावन में वांछित फरार अपराधियों का 'साधु' भेष में छिपने के भी मामले सामने आ रहे हैं वृंदावन में करोड़ों का वित्तीय घोटाला करने वाले अपराधी भी पुलिस से बचने के लिए संतों का चोला ओढ़ रहे हैं। महाराष्ट्र में ₹300 करोड़ का बड़ा बैंक घोटाला करने वाला आरोपी बबन विश्वनाथ शिंदे सिर मुंडवाकर, तिलक-कंठी लगाकर वृंदावन के मंदिर क्षेत्र में साधु बनकर छिपा हुआ था, जिसे पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन में गिरफ्तार किया था। इसके अलावा राजस्थान की एक सवा करोड़ की ठग महिला भी साध्वी का भेष बनाकर वृंदावन में छिपी हुई थी।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी वृंदावन, मथुरा, तिरुपति बालाजी, रामेश्वरम, उज्जैन महाकाल, पुष्कर और खाटूश्याम सहित कई धार्मिक स्थलों पर साध्वी के रूप में रह चुकी थी. विशेष पुलिस टीम ने करीब छह महीने तक गोपनीय सूचनाएं जुटाईं और संभावित ठिकानों पर निगरानी रखी. पुलिस टीम के दो सदस्यों ने साधु का भेष धारण कर धार्मिक कर्मकांड, संस्कृत मंत्रोच्चार और सुंदरकांड पाठ का प्रशिक्षण लिया. इसके बाद टीम वृंदावन के एक आश्रम पहुंची, जहां आरोपी की पहचान कर उससे संपर्क स्थापित किया गया. बाद में उसे जयपुर ले जाकर गिरफ्तार कर लिया.
बताया जाता है कि मास्टर प्लान 2031 के तहत वृंदावन-छटीकरा रोड जैसे प्रमुख धार्मिक कॉरिडोर की 60% जमीन सिर्फ आश्रमों, मठों और धार्मिक स्थलों के लिए आरक्षित की गई थी। लेकिन नियमों को ताक पर रखकर इस आरक्षित जमीन पर बड़े-बड़े कमर्शियल होटल, आलीशान रेस्तरां और अवैध कॉलोनियां खड़ी कर दी गई हैं।मथुरा-वृंदावन में जमीन का अवैध कारोबार और अवैध कॉलोनियों का निर्माण एक बेहद गंभीर समस्या बन चुका है। बांके बिहारी कॉरिडोर और धार्मिक पर्यटन के तेजी से बढ़ने के कारण भू-माफिया सक्रिय हैं, जो बाहर से आने वाले भोले-भाले श्रद्धालुओं और खरीदारों को निशाना बना रहे हैं।
वृंदावन में जमीन के अवैध कारोबार फलफूल रहा है बिना अप्रूवल के अवैध कॉलोनियां: भू-माफिया बिना मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण से लेआउट या मानचित्र स्वीकृत कराए कृषि भूमि, डूब क्षेत्र और सरकारी जमीनों पर अवैध कॉलोनियां काट रहे हैं। कुछ मामलों में पूर्व में बिक चुकी और रजिस्टर्ड जमीनों को नए नक्शों और नए प्रोजेक्ट के नाम पर दोबारा बेचने की धोखाधड़ी सामने आई है।इतना ही नहीं भू-माफिया और सिंडिकेट साधु-संतों के वेश में आकर सरकारी नहर (माइनर की जमीन), प्राचीन कुंडों के पास और धार्मिक संस्थाओं व गौशालाओं की जमीनों पर अवैध कब्जे कर होटल व गेस्ट हाउस बना रहे हैं। आकर्षक विज्ञापनों और '143 अप्रूव्ड' (धारा 143 के तहत गैर-कृषि भूमि होने का झूठा दावा) बताकर लोगों से टोकन मनी हड़प ली जाती है।
प्रशासन और विकास प्राधिकरण का कहना है कि अवैध निर्माणों और भू-माफियाओं के खिलाफ बुलडोजर एक्शन और सीलिंग का अभियान लगातार जारी है इस के लिए ड्रोन सर्वे से पहचान: यमुना खादर और डूब क्षेत्र काली धार घाट से राजपुर खादर तक मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण ने हाई-टेक ड्रोन सर्वे कराकर 1,266 से अधिक अवैध निर्माणों को चिह्नित किया है।
छटीकरा-वृंदावन मार्ग और आवासीय कॉलोनियों में बिना लैंड-यूज चेंज के व्यावसायिक रूप से चल रहे दर्जनों अवैध होटलों, बेसमेंट रेस्टोरेंट और बैंक्वेट हॉलों को सील किया गया है। हाल ही में प्रशासन ने कृष्णापुरी और ध्रुव घाट जनरल गंज जैसे इलाकों में फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पी गई करोड़ों रुपये की सरकारी जमीनों को जेसीबी चलाकर ध्वस्त और कब्जा मुक्त कराया है। एनएच 19 के पास भी अवैध बाउंड्री वॉल हटाने का एक्शन लिया गया है।
धर्मनगरी वृंदावन में हाल के समय में आस्था और पवित्रता की आड़ में कुछ अनैतिक और विवादित मामले सामने आए हैं, जिन्हें लेकर श्रद्धालुओं और धार्मिक संगठनों में रोष है।वृंदावन और मथुरा क्षेत्र में मांस, अंडा और मछली की बिक्री पर प्रतिबंध होने के बावजूद, ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स के जरिए नॉनवेज खाने की डिलीवरी का मामला सामने आया है।पिछले दिनों पुलिस ने परिक्रमा मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध ढाबे पर छापा मारकर देह व्यापार के काले कारोबार का खुलासा किया था, जिसमें 4 युवतियों समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।
वृंदावन के कुछ कथित बाबाओं और आश्रमों से जुड़े फर्जीवाड़े, अंधविश्वास फैलाने वाले ताबीज, और वित्तीय लेन-देन या नामी हस्तियों को बुलाने के बड़े दावों से जुड़े विवाद भी चर्चा में रहे हैं। धार्मिक क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर बिना अनुमति के सैकड़ों पेड़ों के काटे जाने और अवैध प्लाटिंग के मामले भी सामने आए हैं।
हाल ही में चर्चित बाबा के एक परिकर रसिक दुलारी शरण की प्राइवेट पार्ट काटने और कथित खुदकुशी की वारदात की मिस्ट्री को पुलिस अभी तक नही सुलझा सकी है जिससे पता चलता है कि स्थानीय प्रशासन बड़े रसूखदार लोगों के प्रभाव में काम कर रहा है और गंभीर मामलों को भी जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डालने की जुगत की जाती है। बहरहाल एक प्राचीन धर्मनगरी के गौरव और स्वरूप को बचाने के लिए बहरूपियो धोखेबाज और पाखंडीयो से श्रद्धा और आस्था के वशीभूत समाज को सावधान सतर्क रहने की जरूरत है ।
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