राम गया शिवपुर में पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

सुबह से ही गंगा घाट पर जुटने लगे श्रद्धालु

प्रवीण तिवारी Picture
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मीरजापुर।

मीरजापुर।विंध्याचल मां विंध्यवासिनी की पावन नगरी विंध्याचल के राम गया शिवपुर में अमावस्या के अवसर पर पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे। दिन चढ़ने के साथ ही श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती गई। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सुबह से लेकर अब तक लाखों श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना से तर्पण एवं पिंडदान कर चुके हैं। देर रात तक यह धार्मिक अनुष्ठान जारी रहने की संभावना है।


दूसरे गया के नाम से प्रसिद्ध है राम गया शिवपुर

राम गया शिवपुर को धार्मिक मान्यताओं के कारण दूसरे गया के रूप में जाना जाता है। यहां उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान और तर्पण करने पहुंचते हैं। अमावस्या के दिन इस स्थान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।

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भगवान श्रीराम से जुड़ी है पिंडदान की मान्यता

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम माता सीता के साथ अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान करने के लिए राम गया शिवपुर पहुंचे थे। तभी से इस स्थान पर पितरों के तर्पण और पिंडदान की परंपरा जुड़ी मानी जाती है। श्रद्धालुओं के बीच यह विश्वास आज भी गहरी आस्था के रूप में कायम है।

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गंगा की धारा में मौजूद है प्रभु श्रीराम का पदचिह्न

मान्यता है कि यहां मां गंगा की धारा के भीतर भगवान श्रीराम के चरणचिह्न मौजूद हैं। जब गंगा का जलस्तर कम होता है और धारा पीछे हटती है, तब श्रद्धालुओं को इन पदचिह्नों के दर्शन होने की बात कही जाती है। इसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था है।

कई राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु

अमावस्या के अवसर पर राम गया शिवपुर में दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहता है। लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति, सद्गति और मोक्ष की कामना के साथ धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। गंगा तट पर पूजा-पाठ और पिंडदान का दृश्य पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना देता है।

गया जाने से पहले राम गया शिवपुर में पिंडदान की मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गया धाम में पिंडदान करने जाने वाले अनेक श्रद्धालु सबसे पहले विंध्याचल स्थित राम गया शिवपुर पहुंचकर अपने पितरों का तर्पण और पिंडदान करते हैं। इसके बाद वे बिहार के गया धाम जाकर पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि राम गया शिवपुर में पिंडदान करने के बाद गया धाम जाने की परंपरा विशेष धार्मिक महत्व रखती है। इसी आस्था के चलते अमावस्या सहित अन्य महत्वपूर्ण तिथियों पर यहां दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं।

पीढ़ियों से चली आ रही है परंपरा

राम गया शिवपुर में पिंडदान और तर्पण की परंपरा श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। स्थानीय मान्यताओं में इसे भगवान श्रीराम के समय से चली आ रही परंपरा माना जाता है। इसी विश्वास के चलते हर अमावस्या पर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। विशेष रूप से पितरों के निमित्त किए जाने वाले अनुष्ठानों के कारण राम गया शिवपुर की पहचान दूर-दूर तक बनी हुई है।

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