174 यात्रियों की जिंदगी बचाने वाले कैप्टन स्मित मछार की कहानी, आसमान में दिखाया साहस तो जमीन पर भी दिल जीतती है उनकी दरियादिली
नई दिल्ली। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में को-पायलट के हमले के बावजूद 174 यात्रियों और क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचाने वाले कैप्टन स्मित मछार इन दिनों चर्चा में हैं। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद जिस तरह उन्होंने हालात को संभाला, उसने उनके साहस और सूझबूझ को सामने ला दिया।
लेकिन स्मित मछार को करीब से जानने वाले लोगों के लिए उनका यह धैर्य और संयम कोई नई बात नहीं है। 39 वर्षीय कैप्टन स्मित को उनके दोस्त एक शांत, स्थिर और जमीन से जुड़े इंसान के तौर पर याद करते हैं। उनके मुताबिक, मुश्किल परिस्थितियों में भी स्मित घबराने के बजाय धैर्य के साथ फैसला लेने के लिए जाने जाते हैं।
दोस्तों के बीच अपनी दरियादिली के लिए मशहूर
स्मित के परिचित बताते हैं कि पायलट बनने और आसमान में सैकड़ों यात्रियों की जिम्मेदारी संभालने से पहले भी उनके व्यक्तित्व में सादगी और संवेदनशीलता प्रमुख रही है। दोस्तों के बीच उनकी दरियादिली और मदद करने की आदत की अक्सर चर्चा होती रही है।
फ्लाइट में हुए हमले के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने जिस तरह कॉकपिट का दरवाजा खोलकर यात्रियों और क्रू को अंदर आने का मौका दिया, वह उनके शांत दिमाग और जिम्मेदारी के भाव को दिखाता है।
मुश्किल वक्त में भी नहीं खोया संयम
फ्लाईदुबई की उड़ान में को-पायलट के हमले के बाद हालात बेहद गंभीर हो गए थे। विमान तेजी से नीचे आया और यात्रियों के सामने बड़ा खतरा पैदा हो गया। ऐसे समय में घायल कैप्टन स्मित मछार ने खुद को संभाला और विमान में मौजूद लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
Read More मंधना स्टेशन बनेगा बड़ा टर्मिनल! एलिवेटेड कॉरिडोर से पहले पार्किंग-ट्रांसपोर्ट की तैयारी तेजजिस इंसान को दोस्त शांत और दरियादिल बताते हैं, उसी ने संकट की घड़ी में अपने साहस से 174 यात्रियों और क्रू मेंबर्स को सुरक्षित निकालने में अहम भूमिका निभाई। उनके इस साहस के बाद अब उनके व्यक्तित्व के उस पहलू की भी चर्चा हो रही है, जो उन्हें जानने वाले लोग पहले से जानते थे।


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