18 वर्षों से एक ही कार्यालय में जमे टेंडर बाबू विनोद चौधरी, भदोही ट्रांसफर के बाद फिर मिर्जापुर वापसी पर उठे सवाल

प्रवीण तिवारी Picture
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मीरजापुर।

मिर्जापुर। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, विद्युत वितरण मंडल फतहां, मीरजापुर स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय में टेंडर से जुड़े कार्यों से संबंधित बाबू विनोद चौधरी की करीब 18 वर्षों से एक ही कार्यालय में तैनाती को लेकर विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

 

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लंबे समय से एक ही कार्यालय और टेंडर से जुड़े कार्यों में बने रहने को लेकर विभागीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि विनोद चौधरी का बीच में मिर्जापुर से भदोही स्थानांतरण किया गया था, लेकिन कुछ समय बाद वह दोबारा मिर्जापुर लौट आए। स्थानांतरण के बाद पुनः उसी कार्यालय में वापसी को लेकर अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसी क्या प्रशासनिक परिस्थितियां रहीं, जिसके चलते लंबे समय से मिर्जापुर में तैनात कर्मचारी का स्थानांतरण होने के बाद फिर से इसी कार्यालय में आना हुआ।

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स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के मुताबिक बिजली विभाग में टेंडर से जुड़े कार्यों को लेकर लंबे समय से सक्रिय रहने के कारण विभाग में काम करने वाले कुछ ठेकेदारों से बाबू की कथित नजदीकियां बनी हुई हैं। आरोप लगाने वाले लोगों का कहना है कि करीब 18 वर्षों की लंबी तैनाती के कारण विभागीय कामकाज और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े मामलों में उनकी पकड़ मजबूत हो गई है। हालांकि ठेकेदारों से कथित साठगांठ, आर्थिक लाभ अथवा किसी अनियमितता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है

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और संबंधित बाबू का पक्ष भी सामने आना बाकी है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए विभागीय स्तर पर निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि विभाग में कर्मचारियों के लंबे समय तक एक ही कार्यालय अथवा एक ही पटल पर बने रहने से पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका रहती है, तो करीब 18 वर्षों तक एक ही कार्यालय में तैनाती की समीक्षा क्यों नहीं की गई। विभागीय जानकारों के अनुसार किसी कर्मचारी की लंबी तैनाती के पीछे प्रशासनिक कारण हो सकते हैं,

 

लेकिन स्थानांतरण के बाद पुनः उसी स्थान पर वापसी होने पर संबंधित आदेशों और अभिलेखों की जांच से स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। ऐसे में बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग उठ रही है कि विनोद चौधरी की मिर्जापुर में अब तक की पूरी तैनाती अवधि, बीच में हुए भदोही स्थानांतरण, पुनः मिर्जापुर में तैनाती के आदेश तथा उनके द्वारा देखे गए टेंडर संबंधी कार्यों की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। साथ ही जिन ठेकेदारों से उनके कथित संबंधों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उनसे संबंधित टेंडर प्रक्रिया और विभागीय अभिलेखों की भी नियमानुसार जांच की जाए, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता है

 

तो वह सामने आ सके और यदि आरोप निराधार हैं तो स्थिति भी साफ हो सके। फिलहाल 18 वर्षों से एक ही कार्यालय में टेंडर से जुड़े कार्यों में सक्रिय रहने और भदोही स्थानांतरण के बाद पुनः मिर्जापुर लौटने का मामला विभागीय गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है और अब निगाहें बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस लंबे कार्यकाल की समीक्षा कर पूरे मामले पर क्या कदम उठाते हैं।

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