गंगा के अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों से मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट
बिहार को गंगा के बाढ़ क्षेत्र से अवैध कब्जे हटाने के लिए आठ सप्ताह की मोहलत
नई दिल्ली। गंगा नदी के किनारों और बाढ़ क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने बिहार सरकार को गंगा के बाढ़ क्षेत्र से अवैध कब्जे हटाने के लिए आठ सप्ताह की अंतिम मोहलत दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इसके बाद इस मामले में और समय नहीं दिया जाएगा।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने गंगा की स्थिति और नदी के किनारों पर अतिक्रमण को लेकर चिंता जताई। सुप्रीम कोर्ट पहले ही संबंधित राज्यों से गंगा के किनारे और बाढ़ मैदानों में मौजूद अतिक्रमण की स्थिति तथा उन्हें हटाने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी मांग चुका है। मार्च 2026 में अदालत ने गंगा से जुड़े राज्यों से मौजूदा स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।
11 राज्यों को जारी हुआ था नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने गंगा से जुड़े मामले का दायरा बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली समेत राज्यों से नदी के किनारों और बाढ़ क्षेत्रों में अतिक्रमण की स्थिति की जानकारी मांगी थी। अदालत ने यह भी पूछा था कि अतिक्रमण हटाने और गंगा के संरक्षण के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
बिहार में बड़ी संख्या में अवैध निर्माण चिन्हित
बिहार सरकार की ओर से दाखिल रिपोर्ट में पटना क्षेत्र में गंगा के किनारे अवैध निर्माण और अतिक्रमण की पहचान किए जाने की जानकारी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, विभिन्न सर्वेक्षणों में अवैध निर्माण चिन्हित किए गए और उन्हें हटाने के लिए कार्रवाई शुरू की गई है।
अलकनंदा-भागीरथी में नई जलविद्युत परियोजनाओं पर रोक का रुख
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि उत्तराखंड की अलकनंदा और भागीरथी नदी घाटियों में पहले से मंजूर सात परियोजनाओं के अलावा नई जलविद्युत परियोजनाओं का समर्थन नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब राज्यों की ओर से अतिक्रमण हटाने और नदी के बाढ़ क्षेत्रों की सीमा तय करने को लेकर उठाए गए कदमों पर नजर रहेगी।


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