भारत ने एथलेटिक्स में जीता पहला स्वर्ण, चार बेटियों ने रचा इतिहास
महिला 4x400 मीटर रिले में भारतीय टीम ने जीता गोल्ड, एशियन गेम्स में भारत का छठा स्वर्ण
आइची-नागोया। एशियन गेम्स 2026 के 10वें दिन भारत को एथलेटिक्स में आखिरकार स्वर्ण पदक मिल गया। भारतीय महिला 4x400 मीटर रिले टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया और देश के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता। प्राची, पूवम्मा, किरण और वित्या रामराज की चौकड़ी ने 3 मिनट 29.69 सेकंड का समय निकालकर यह उपलब्धि हासिल की। मौजूदा एशियन गेम्स में यह भारत का कुल छठा और 10वें दिन का दूसरा स्वर्ण पदक है।
29 सितंबर को एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं का अंतिम दिन था। ट्रैक एंड फील्ड में लगातार रजत और कांस्य पदक मिलने के बीच भारत को एक स्वर्ण की तलाश थी। महिला रिले टीम ने प्रतियोगिता के अंतिम दौर में यह इंतजार खत्म कर दिया।
चारों धाविकाओं ने दिखाया दम
फाइनल में किरण ने भारत के लिए रेस की शुरुआत की और इसके बाद पूवम्मा को बैटन सौंपी। 36 वर्षीय पूवम्मा ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए भारतीय टीम को शीर्ष तीन में पहुंचाया। इसके बाद प्राची ने मोर्चा संभाला और टीम को दूसरे स्थान तक पहुंचाया।
अंतिम राउंड में बैटन वित्या रामराज के हाथों में पहुंचते ही मुकाबले का रुख बदल गया। एक दिन पहले ही 400 मीटर हर्डल्स में कांस्य पदक जीतने वाली वित्या ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चीन की धाविका को पीछे छोड़ दिया और भारत को पहले स्थान पर पहुंचा दिया। बहरीन की धाविका ने उन्हें कड़ी चुनौती दी, लेकिन वित्या ने बढ़त कायम रखते हुए भारत को स्वर्ण पदक दिला दिया।
वित्या रामराज का तीसरा पदक
वित्या रामराज के लिए यह स्वर्ण पदक इसलिए भी खास रहा, क्योंकि मौजूदा एशियन गेम्स में यह उनका तीसरा पदक है। इससे पहले उन्होंने 4x400 मीटर मिश्रित रिले में रजत और 400 मीटर हर्डल्स में कांस्य पदक जीता था।
Read More मां राबड़ी देवी की याद में भावुक हुए तेज प्रताप, बेटी को याद कर फूट-फूटकर रोईं स्वरा भास्कर400 मीटर हर्डल्स में कांस्य जीतने के दौरान वित्या ने महान भारतीय धाविका पीटी उषा का पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ा। इससे पहले वह इस रिकॉर्ड की बराबरी कर चुकी थीं, लेकिन अब रिकॉर्ड पूरी तरह उनके नाम हो गया है।
महिला 4x400 मीटर रिले में इस स्वर्ण के साथ भारत ने एथलेटिक्स में भी गोल्ड का खाता खोल दिया। चारों भारतीय धाविकाओं के शानदार प्रदर्शन ने देश के पदक अभियान में एक और यादगार अध्याय जोड़ दिया।


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