छह किलोमीटर सड़क के निर्माण के लिए 26 वर्षों से ग्रामीण कर रहे रहनुमा का इंतजार

Swatantra Prabhat UP Picture
Published On

कुडू, लोहरदगा, झारखंड:- 
 
लोहरदगा जिले के कुडू प्रखंड अंतर्गत चांपी से धौरा तक करीब छह किलोमीटर लंबी सड़क की स्थिति बद से बदतर हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2000 में एकीकृत बिहार के समय इस सड़क का निर्माण हुआ था। इसके बाद 26 वर्षों में सड़क का दोबारा निर्माण या मरम्मत नहीं हुई। वर्तमान स्थिति ऐसी है कि सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल है और मोटरसाइकिल से आवागमन करना भी जोखिम भरा है।
 
चांपी से धौरा के बीच चांपी, कुंदगदा, डूमरटोली, बहराटोली, चुंदपतरा टोली, सलगी, जोगाटोली और धौरा सहित कई गांव एवं टोले पड़ते हैं। इन सभी गांवों और टोलों की आबादी को मिला दिया जाए तो करीब 20 से 30 हजार लोग इस सड़क पर निर्भर हैं। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले 26 वर्षों में कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से सड़क निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।
 
इस सड़क के बीच कई विद्यालय, स्वास्थ्य उपकेंद्र, चर्च, मंदिर, सरना स्थल, हाट-बाजार और दुकानें हैं। किसान, मजदूर, विद्यार्थी और आम ग्रामीण प्रतिदिन जर्जर सड़क के कारण परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
 
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। उनका कहना है कि पिछले दिनों सर्पदंश के चार मामलों में पीड़ितों को धौरा से लोहरदगा ले जाने में अधिक समय लग गया, जिससे उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
 
  ■ सड़क विहीन जौरा गांव में एंबुलेंस पहुंचना भी मुश्किल:
 
राजस्व गांव धौरा के अंतर्गत आने वाला जौरा गांव भी सड़क की समस्या से जूझ रहा है। धौरा से करीब तीन से चार किलोमीटर दूर स्थित इस गांव की आबादी लगभग 200 से 250 है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस तक नहीं पहुंच पाती है। प्रसव जैसी आपात स्थिति में प्रसूता को खाट या डोला के सहारे मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है।
 
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 1983 में यहां से लेटराइट पत्थर डालमिया सीमेंट फैक्ट्री, डेहरी तक भेजा जाता था और उस समय यहां सड़क हुआ करती थी। ग्रामीणों ने जनता दरबार में भी सड़क निर्माण की मांग उठाई, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ।
 
 ■ असनापानी भी सड़क सुविधा से वंचित:
 
वहीं, धौरा से असनापानी गांव तक भी आज तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी वाले इस गांव में लगभग 84 परिवार निवास करते हैं। ग्रामीण आज भी कच्ची सड़क के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं।
 
इस संबंध में सामाजिक विचार मंच के संयोजक कवलजीत सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और झारखंड सरकार को इस गंभीर समस्या पर शीघ्र ध्यान देते हुए अविलंब सड़क का निर्माण कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी यदि ग्रामीण एक सड़क के लिए 26 वर्षों से इंतजार कर रहे हैं, तो यह चिंता का विषय है।
 
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री, राज्यपाल, जिला प्रशासन एवं अन्य जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया जाएगा। इसके बावजूद सड़क निर्माण की दिशा में पहल नहीं हुई तो ग्रामीणों के साथ मिलकर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
 

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें

नवीनतम समाचार