आतंकी संगठन से गलबहियां करने वाले मेयर ममदानी को संघ प्रमुख मोहन भागवत का विरोध करने का कोई अधिकार नहीं: हिन्दू विचार मंच पाकुड़िया इकाई

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत अपने तीन देशों की यात्रा पर हैं। इस यात्रा के क्रम में भागवत जी अमेरिका, कनाडा व ब्रिटेन जाएंगे।

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पाकुड़िया, पाकुड़, झारखंड:-
 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत अपने तीन देशों की यात्रा पर हैं। इस यात्रा के क्रम में भागवत जी अमेरिका, कनाडा व ब्रिटेन जाएंगे। परंतु न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी एवं धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी एडवाइजरी संस्था यूएससीआईआरएफ ने अमेरिकी सरकार से वीजा नहीं देने की अपील की है। न्यूयॉर्क में आयोजित इस यात्रा का विरोध करते हुए यह कहा गया है कि संघ से जुड़े हिन्दू संगठनों पर धार्मिक भेदभाव करते हुए अल्पसंख्यकों के विरुद्ध धार्मिक हिंसा का आरोप है। यद्यपि भारत सरकार ने ऐसे निराधार आरोपों को खारिज करते हुए यूएससीआईआरएफ की विश्वसनीयता व आकलन पर भी सवाल उठाया है।
 
वहीं दूसरी ओर ममदानी के विरोध के बीच यूनिवर्सल अवेयरनेस सेलिब्रेशन कार्यक्रम के आयोजक अमेरिकन हिन्दूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (एहेड) का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मौजूद खाता निलंबित किए जाने की सूचना है। संघ प्रमुख मोहन भागवत का कार्यक्रम न्यूयॉर्क के मैडिसन गार्डन स्थित इंफोसिस थिएटर में 29 अगस्त को आयोजित किया गया है। कार्यक्रम में सभी धर्मों के पांच हजार लोगों व 250 संगठनों के शामिल होने की संभावना है।
 
जोहरान ममदानी भारत विरोधी होने के अलावा आतंकी गुटों के समर्थक रहे हैं। हिन्दू विचार मंच ने एक सवाल के जवाब में कहा है कि आरएसएस सनातन सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षक रहा है और सनातन संस्कृति के मूल घोष वाक्य ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की अवधारणा पर मानवता का पक्षधर है। भारतीय राष्ट्रीय भावना को सर्वोपरि मानते हुए देश के समस्त नागरिकों को प्रेरित करता रहा है।
 
क्या भारतवर्ष में अपनी कालजयी सनातन सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर राष्ट्रीय भाव का प्रचार-प्रसार करना अल्पसंख्यकों के विरुद्ध धार्मिक हिंसा कहना उचित है?
 
हिन्दू विचार मंच ने पूरे जोर देकर दावे के साथ कहा है कि भारत विश्व का सर्वाधिक प्राचीन सांस्कृतिक मूल्य आधारित राष्ट्र है और पंथनिरपेक्ष व प्रजातांत्रिक राष्ट्र है। इस राष्ट्र में बहुसंख्यक सनातनियों ने कभी भी धार्मिक अल्पसंख्यकों को पीड़ित नहीं किया है बल्कि उन्हें धार्मिक अधिकारों के साथ प्रगति की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। लेकिन राष्ट्रविरोधी तत्वों को दंड देना राष्ट्रीय धर्म है।
 
मंच का मानना है कि यदि जोहरान ममदानी में साहस है तो वे भारतवर्ष के जम्मू-कश्मीर सहित देश के अन्य नगरों में इस्लाम के नाम पर होती रही आतंकी गतिविधियों की निंदा करने का साहस दिखाएं।
 

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