समाज के प्रति समर्पण खींच लाई जन्मभूमि तक

समाज सेवा बहुत बड़ी सेवा है यह गुण किसी किसी में आता है वह भी अगर उसके कुल खानदान की सोच जब सच्ची होती है तब उस कुल में समाज के प्रति चिंतक व्यक्ति का जन्म होता है।

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स्वतंत्र प्रभात विशेष संवाददाता प्रदीप यादव 
 
 
समाज सेवा बहुत बड़ी सेवा है यह गुण किसी किसी में आता है वह भी अगर उसके कुल खानदान की सोच जब सच्ची होती है तब उस कुल में समाज के प्रति चिंतक व्यक्ति का जन्म होता है।
 
आपको बता दें कि दिल्ली के विधान सभा पटेल नगर में अगर किसी समाज सेवक का नाम लिया जाय तो पहला नाम एस के चौबे का आ ही जाता है, यह किसी को प्रोत्साहित या निराश करने के लिए बोला जा रहा है बल्कि यह वास्तविकता है।
 
एस के चौबे अपने टीम के साथ मिलकर दिल्ली में तो समाज की सेवा बड़े स्तर पर कर ही रहे है जैसे कि शिक्षा के लिए बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना गरीब कन्याओं की शादी करवाना, रेहड़ी, पटरी वालों के लिए संघर्ष करना, झुग्गी झोपड़ी वालों के लिए संघर्ष करना, नशे के खिलाफ संघर्ष करना जैसे तमाम समाजहित का कार्य करते रहते है।अब एस के चौबे द्वारा अपने जन्मस्थली जौनपुर के अपने निज गांव के प्राथमिक विद्यालय को 5 कंप्यूटर भेंट किए।
 
पूछने पर बताएं कि आज कल निजी संस्थानों से बच्चों को शिक्षा दिलाना एक चलन सा हो गया है जबकि सरकारी विद्यालयों में शिक्षित शिक्षक होने के बावजूद भी लोग अपने बच्चों का दाखिला सरकारी विद्यालयों में करवाने से कतराते है जबकि गरीबों के लिए आखिरी आश्रय यह सरकारी विद्यालय ही है ये ऐसे बच्चे होते है जिनको कॉपी पेंसिल भी बड़े मुश्किल से उनके मां बाप दिला पाते है।
 
ऐसे बच्चों को आज के आधुनिक युग की पढ़ाई नसीब हो पाना मुश्किल है इसलिए इन बच्चों के उज्जवल भविष्य और अच्छे शिक्षा हेतु यह उपहार स्वरूप 5 कंप्यूटर दिया गया है। विद्यालय के अध्यापक भी वचनबद्ध है कि अब हम अपना 100% देकर इन बच्चों को मेहनत करके पढ़ाएंगे और इनको निजी संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों से भी बेहतर बनाएंगे। एस के चौबे का कहना है कि अगर हमारे इस कदम से कुछ बच्चे भी अच्छे से पढ़ने लिखने लगे और आगे निकल गए तो जीवन में समाज सेवा का फल मिल जाएगा।
 
बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड विकास अधिकारी से भी एस के चौबे संपर्क में है विद्यालय को जिले में एक स्थान दिलाने के लिए और जल्द ही विद्यालय को स्मार्ट क्लास में बदलने के लिए संकल्पित है। विद्यालय के कुछ खिड़की दरवाजा भी ठीक करवाए और जो छत टपक रहे है उसको मरम्मत कराने के लिए भी बोल दिये है।
 
आज के समय में जहां एक कमाने खाने वाला आदमी अपना व अपने बच्चों का पेट पालने और खुद के विकास के लिए परेशान है चोरी बेइमानी सब कर रहा है वही एस के चौबे यह जिम्मेदारी निभाते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए अपनी क्षमतानुसार समाजहित के कार्यों में अपना सहयोग देते रहते है। 
 
अभी विगत वर्ष दिल्ली के पटेल नगर में भी एस के चौबे ने बच्चों के अच्छी शिक्षा के लिए कंप्यूटर दान किए थे। आखिरी में चौबे ने बताया कि जो मुझसे हो सका मैने किया अब जिम्मेदारी हमारे गांव और समाज के लोगों का है कि अपने बच्चों को इस विद्यालय तक पहुंचाए, संसाधनों की देख रेख करें और अध्यापकों के शिक्षण गतिविधियों पर भी ध्यान दें।
 
 

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