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RTI लगाई, फिर भी सूचना गायब! अधिकारियों की मनमानी पर उठे गंभीर सवाल, ग्राम पंचायत सिकटा के विकास कार्यों का हिसाब देने से क्यों कतरा रहे जिम्मेदार
मीरजापुर।
मीरजापुर। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध न होने का मामला सामने आया है। विकासखंड हलिया के ग्राम पंचायत सिकटा में वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक कराए गए विकास कार्यों एवं वित्तीय लेन-देन का विस्तृत विवरण मांगने के लिए लोक सूचना अधिकारी, जिलाधिकारी जनपद मीरजापुर को
आरटीआई आवेदन दिया गया था। आवेदन में ग्राम पंचायत में कराए गए सभी विकास कार्यों की वर्षवार सूची, कार्य का नाम, स्थान, स्वीकृति संख्या, प्रारंभ एवं पूर्ण होने की तिथि सहित विभिन्न अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
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आरटीआई आवेदन में प्रत्येक विकास कार्य के लिए स्वीकृत धनराशि, खर्च की गई धनराशि और भुगतान का पूरा विवरण तथा संबंधित माप पुस्तिका (एम.बी.) की प्रमाणित प्रति मांगी गई है। इसके साथ ही कार्य कराने वाले ठेकेदार, फर्म अथवा संस्था का नाम-पता और उन्हें किए गए भुगतान का विवरण भी मांगा गया है। मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, हैंडपंप, स्ट्रीट लाइट, खड़ंजा एवं नाली निर्माण जैसी योजनाओं के लाभार्थियों की सूची और चयन प्रक्रिया से संबंधित अभिलेख भी मांगे गए हैं।
आवेदन में पंचायत निधि, राज्य वित्त एवं 15वें वित्त आयोग से खरीदी गई सामग्री के बिल-वाउचर, ग्राम पंचायत की बैठकों की कार्यवाही रजिस्टर तथा वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक पंचायत खाते में प्राप्त कुल धनराशि एवं मदवार व्यय का बैंक स्टेटमेंट भी मांगा गया है। साथ ही कराए गए कार्यों की गुणवत्ता एवं तकनीकी जांच रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
आवेदनकर्ता का कहना है कि आरटीआई के माध्यम से सार्वजनिक धन से कराए गए विकास कार्यों और खर्च की गई धनराशि से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी, लेकिन निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद सूचना उपलब्ध न होने से सवाल खड़े हो रहे हैं। आवेदन में नियमानुसार सूचना उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था और अतिरिक्त शुल्क होने पर आवेदक को सूचित करने की बात भी कही गई थी।
मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आरटीआई के तहत ग्राम पंचायत के विकास कार्यों, भुगतान और सरकारी धन के इस्तेमाल से संबंधित अभिलेख मांगे गए हैं तो संबंधित विभाग द्वारा सूचना उपलब्ध कराने में देरी क्यों हो रही है? सूचना के अधिकार का उद्देश्य सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। ऐसे में यदि सूचना नहीं मिलती है तो इससे ग्रामीणों के बीच भी तरह-तरह के सवाल उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और ग्राम पंचायत सिकटा में वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2024-25 तक कराए गए विकास कार्यों एवं खर्च की गई सरकारी धनराशि का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए।


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