रात 10 बजे के बाद रक्त की बूंदों से होगी फाइलेरिया के परजीवी की तलाश, सारण के 20 प्रखंडों में नाइट ब्लड सर्वे

हर प्रखंड में तीन साइट पर होगी जांच, प्रत्येक साइट से 300 लोगों के रक्त के नमूने लेने का लक्षय

BIHAR SWATANTRA PRABHAT Picture
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छपरा (सारण)। फाइलेरिया संक्रमण की पहचान के लिए सारण जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से नाइट ब्लड सर्वे (एनबीएस) की तैयारी शुरू कर दी गई है। छपरा शहरी क्षेत्र समेत जिले के सभी 20 प्रखंडों में यह सर्वे कराया जाएगा। इसके तहत 20 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों के रक्त के नमूने लेकर उनमें फाइलेरिया के परजीवी की मौजूदगी का पता लगाया जाएगा। रक्त संग्रह रात 10 बजे के बाद किया जाएगा, क्योंकि फाइलेरिया के कुछ परजीवी रात के समय परिधीय रक्त में अधिक संख्या में मौजूद होते हैं। इससे उनकी पहचान करने में मदद मिलती है।

स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे के लिए माइक्रोप्लान तैयार कर लिया है और गांवों का चयन भी किया जा चुका है। प्रत्येक प्रखंड में तीन रक्त संग्रह केंद्र बनाए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से निर्धारित आयु वर्ग के लोगों के रक्त के नमूने एकत्र कर जांच की जाएगी। सर्वे के परिणामों के आधार पर संबंधित क्षेत्रों में फाइलेरिया संक्रमण की स्थिति का आकलन किया जाएगा, जिससे आगे की रोकथाम और नियंत्रण संबंधी गतिविधियों की योजना बनाने में मदद मिलेगी।

प्रत्येक प्रखंड में 900 लोगों के नमूने लेने का लक्षय:

नाइट ब्लड सर्वे के तहत प्रत्येक प्रखंड में तीन साइट निर्धारित की गई हैं। इनमें एक स्थायी केंद्र यानी सेंटिनल साइट और दो अस्थायी केंद्र यानी रैंडम साइट शामिल होंगे। प्रत्येक साइट से 300 लोगों के रक्त के नमूने लेने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस तरह प्रत्येक प्रखंड में कुल 900 लोगों के नमूने एकत्र किए जाएंगे। जिले के 20 प्रखंडों में इस लक्ष्य के अनुसार कुल 18 हजार रक्त नमूने लेने की योजना है।

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हर साइट पर पांच सदस्यीय टीम करेगी काम:

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जिला वेक्टर रोग सलाहकार सुधीर कुमार ने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे के लिए प्रत्येक साइट पर पांच सदस्यीय टीम गठित की गई है। इसमें सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), लैब टेक्नीशियन, एएनएम, आशा कार्यकर्ता और अन्य संबंधित स्वास्थ्यकर्मी शामिल होंगे। टीम निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रक्त के नमूने एकत्र करने और जांच संबंधी कार्यों को पूरा करेगी। अभियान की निगरानी के लिए जिला स्तर पर भी मॉनिटरिंग टीम गठित की गई है, जो सर्वे की गतिविधियों पर नजर रखेगी।

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आशा और आंगनबाड़ी कर्मियों के सहयोग से होगा प्रचार:

रात में रक्त के नमूने लिए जाने के कारण लोगों को सर्वे के उद्देश्य और समय की जानकारी देना महत्वपूर्ण है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कर्मियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से जनजागरूकता अभियान चला रहा है। लोगों को बताया जा रहा है कि रक्त की जांच क्यों आवश्यक है और इससे फाइलेरिया संक्रमण की पहचान में किस प्रकार मदद मिलती है। विभाग का प्रयास है कि निर्धारित आयु वर्ग के अधिक से अधिक लोग सर्वे में भाग लें।

रात में ही क्यों लिया जाता है रक्त का नमूना?

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. भूपेंद्र कुमार ने बताया कि नाइट ब्लड सर्वे के लिए रात का समय निर्धारित करने के पीछे वैज्ञानिक कारण है। फाइलेरिया के कुछ परजीवी रात के समय परिधीय रक्त में अधिक संख्या में दिखाई देते हैं। इसलिए रात में रक्त का नमूना लेने से उनकी पहचान की संभावना बढ़ जाती है। इसी वजह से रक्त संग्रह के लिए रात 10 बजे से 12 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है। जांच के नतीजों से संबंधित क्षेत्रों में संक्रमण की स्थिति का पता लगाने और आवश्यक नियंत्रण गतिविधियों की योजना बनाने में मदद मिलेगी।

फाइलेरिया नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है सर्वे:

फाइलेरिया मच्छरों के काटने से फैलने वाला परजीवी रोग है। लंबे समय तक संक्रमण रहने पर मरीज के हाथ-पैर में असामान्य सूजन और हाइड्रोसील जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। संक्रमण की पहचान और समय पर नियंत्रण संबंधी कदम उठाने में नाइट ब्लड सर्वे की महत्वपूर्ण भूमिका है।

सारण जिले में इस सर्वे के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग को उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जहां फाइलेरिया के परजीवी मौजूद हैं। इसके आधार पर निगरानी और नियंत्रण संबंधी गतिविधियों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकेगा। विभाग की ओर से निर्धारित केंद्रों पर रक्त संग्रह की व्यवस्था सुचारु रखने और लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने की तैयारी की जा रही है।

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