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मीरजापुर में रावण दहन नहीं, प्रभु श्रीराम करते हैं रावण का सिर कलम
150 साल पुरानी अनोखी परंपरा आज भी कायम, ड्रमडगंज में दशहरे पर उमड़ती है लाखों श्रद्धालुओं की भीड़।
मेला का निरीक्षण करने पहुंचे उप जिला अधिकारी लालगंज व शिओ लालगंज
मीरजापुर।
मीरजापुर। देशभर में विजयादशमी के अवसर पर रावण के पुतले का दहन किया जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले में एक ऐसी अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जो इसे अन्य स्थानों से अलग बनाती है। जिले के ड्रमडगंज क्षेत्र में दशहरे के दिन रावण के पुतले को जलाया नहीं जाता, बल्कि प्रभु श्रीराम तलवार से उसका सिर कलम कर विजयादशमी का पर्व मनाते हैं। करीब 150 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।

रामलीला के बाद होता है रावण का सिर कलम
ड्रमडगंज में आयोजित होने वाला दशहरा मेला ऐतिहासिक महत्व रखता है।वहीं मनोज केसरी के अनुसार, यहां करीब 150 वर्षों से इसी परंपरा के अनुसार दशहरा मनाया जा रहा है। रामलीला संपन्न होने के बाद विजयादशमी की रात करीब आठ बजे प्रभु श्रीराम रावण के सिर को तलवार से कलम करते हैं। लगभग 20 फीट ऊंचे रावण के पुतले का सिर काटे जाने का दृश्य देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं।

मनोज केशरी के मुताबिक, रावण का पुतला तैयार करने की प्रक्रिया लगभग दो महीने पहले शुरू हो जाती है। बांस और लोहे की सहायता से पुतला बनाया जाता है। इसके बाद विजयादशमी के दिन प्रभु श्रीराम द्वारा उसका सिर कलम किया जाता है। इस अनोखे दृश्य को देखने के लिए मीरजापुर के अलावा मध्य प्रदेश और प्रयागराज सहित आसपास के कई जनपदों से लोग पहुंचते हैं। मेले में करीब एक लाख लोगों की भीड़ जुटने की बात कही जाती है।

वही मेला में लगभग लाखों की भीड़ इकट्ठा हुई लोग जर्ज्जर दीवारों पर चढ़कर देखते रहे मेला।
वही मेला का जायजा लेने मौके पर पहुंचे उप जिला अधिकारी लालगंज अजीत कुमार व शिओ लालगंज अमर बहादुर ने मेला क्षेत्र का जायजा लिया वही शांति ढंग से मिला सहकुशल संपन्न कराने का निर्देश दिए


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