संतोष दावखर की थ्रिलर फिल्म 'गोंधल'  13 नवंबर केो देश भी में रिलीज होगी

फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (एफएफआई) द्वारा 99वें अकादमी पुरस्कार (ऑस्कर 2027) में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी के लिए

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स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।
 
दयाशंकर त्रिपाठी।
 
 
 फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (एफएफआई) द्वारा 99वें अकादमी पुरस्कार (ऑस्कर 2027) में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि चुने जाने के बाद, प्रशंसित मराठी लोक-थ्रिलर फिल्म गोंधल अब 13 नवंबर, 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में भव्य रिलीज़ के लिए तैयार है।
 
दावखर फिल्म्स के बैनर तले लिखी, निर्देशित और निर्मित इस फिल्म को समीक्षकों से व्यापक सराहना मिली है। अब यह देशभर के दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है। फिल्म भारत में मराठी, हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ भाषाओं में रिलीज़ होगी।
 
 
निर्देशक संतोष दावखर ने ऑस्कर की दौड़ से पहले एक प्रामाणिक क्षेत्रीय कहानी को देशभर के दर्शकों तक पहुँचाने पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा, "जब हमने गोंधल बनाने की शुरुआत की थी, तब हमारा एकमात्र उद्देश्य अपनी मिट्टी की असली संस्कृति, रहस्यमयी लय और अनकही परतों के प्रति पूरी तरह ईमानदार रहना था। यह देखना कि हमारी जड़ों से जुड़ी इस लोक-थ्रिलर को इतना गहरा प्रतिसाद मिला कि यह ऑस्कर में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बन गई, हमारे लिए बेहद सम्मान और भावुकता का क्षण है। अब 13 नवंबर को इसे पूरे भारत में रिलीज़ करना ऐसा लग रहा है, जैसे यह कहानी अपने सफर को पूरा करके वहीं लौट रही है, जहाँ से इसकी शुरुआत हुई थी।"
 
उन्होंने आगे कहा, "सिनेमा की कोई भाषाई सीमा नहीं होती, जब उसकी भावनाएँ सच्ची और दिल से निकली हों। मैं इस बात के लिए बेहद आभारी हूँ कि भारत के हर कोने के दर्शक इस पवित्र और रोमांच से भरे सफर को एक साथ बड़े पर्दे पर अनुभव कर सकेंगे।"
 
महाराष्ट्र के ग्रामीण परिवेश में स्थापित गोंधल जुनून और विश्वासघात के एक अंधकारमय तथा रहस्यमयी जाल की कहानी है। फिल्म की कहानी सुमन नाम की एक युवती के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक दमघोंटू और दुखी वैवाहिक जीवन में फँसी हुई है। इससे बाहर निकलने का रास्ता तलाशते हुए वह अपने प्रेमी सर्जेराव की पारंपरिक और पवित्र गोंधल अनुष्ठान के प्रति गहरी, कट्टर आसक्ति का फायदा उठाती है।
 
रात के अँधेरे में होने वाले इस पारंपरिक लोक-अनुष्ठान के दौरान स्थानीय सत्ता संघर्ष, छिपे हुए इरादे और गुप्त विश्वासघात आपस में टकराते हैं। देखते ही देखते गाँव की एक पवित्र रात अपराध, रहस्य और उसके परिणामों से भरे एक खतरनाक खेल में बदल जाती है, जिसका सच सुबह होने से पहले सामने आना है।
 
फिल्म में किशोर कदम, इशिता देशमुख, योगेश सोहोनी, निशाद भोईर और अनुज प्रभु प्रमुख भूमिकाओं में नज़र आएँगे। फिल्म के संगीत की कमान प्रसिद्ध संगीतकार इलैयाराजा ने संभाली है, जबकि अमलेंदु चौधरी ने सिनेमैटोग्राफी की है।
 
 

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