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कानपुर में होमगार्ड भर्ती के मेडिकल में ‘रिश्वत का खेल’! फिटनेस के नाम पर 50 हजार तक मांगने का आरोप, पुलिस लाइन में बवाल
---------- जितेन्द्र सिंह
कथित वसूली के आरोपों से भड़के अभ्यर्थी, डॉक्टरों के साथ मारपीट और हंगामे से मचा हड़कंप; नकद और ऑनलाइन लेनदेन की जांच में जुटी पुलिस
कानपुर। सरकारी नौकरी पाने का सपना लेकर मेडिकल परीक्षण कराने पहुंचे अभ्यर्थियों के लिए गुरुवार, 15 अक्टूबर की शाम उस समय हंगामे में बदल गई, जब होमगार्ड भर्ती के मेडिकल परीक्षण में कथित धन उगाही के आरोप सामने आए। कानपुर पुलिस लाइन में अभ्यर्थियों ने मेडिकल में फिट घोषित करने के नाम पर रुपये मांगने का आरोप लगाते हुए विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और मारपीट की स्थिति पैदा हो गई। घटना ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और मेडिकल जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मेडिकल पास कराने के नाम पर रुपये मांगने का आरोप-
प्राप्त पुलिस जानकारी के अनुसार, 15 अक्टूबर की शाम करीब 7:30 बजे पुलिस को सूचना मिली कि कुछ अभ्यर्थियों ने डॉक्टर पर पैसे लेने का आरोप लगाते हुए उनके साथ मारपीट की है। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस और सहायक पुलिस आयुक्त कोतवाली अमित कुमार पाण्डेय मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया।
प्रारंभिक जांच में कुछ अभ्यर्थियों से मेडिकल परीक्षण में पास कराने के नाम पर नकद रुपये लेने और कुछ रकम सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर कराने से संबंधित तथ्य सामने आने की बात कही गई है। पुलिस ने संबंधित व्यक्तियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू की।
अभ्यर्थियों की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, मेडिकल फिटनेस के नाम पर 15 हजार से 50 हजार रुपये तक की मांग की जा रही थी। कुछ अभ्यर्थियों ने शारीरिक कमियां बताकर अनफिट घोषित करने की आशंका भी जताई। हालांकि, इन आरोपों से जुड़े प्रत्येक मामले की पुष्टि जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
1947 अभ्यर्थियों की प्रक्रिया पर उठे सवाल-
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कानपुर में होमगार्ड भर्ती के लिए चयनित 1,947 अभ्यर्थियों का मेडिकल परीक्षण और चरित्र सत्यापन 15 से 29 अक्टूबर के बीच कराया जाना निर्धारित था। पहले दिन करीब 200 अभ्यर्थियों को परीक्षण के लिए बुलाए जाने की जानकारी सामने आई है। इस घटना के बाद भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कमांडेंट, होमगार्ड को भी पुलिस की ओर से अवगत कराया गया है। पुलिस के मुताबिक, प्रकरण में सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। विवेचना में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नकद और बैंक खातों में लेनदेन की जांच-
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू कथित रूप से नकद धनराशि लेने के साथ बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराए जाने का है। यदि लेनदेन से जुड़े आरोप साक्ष्यों से प्रमाणित होते हैं, तो जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि रकम किसने मांगी, किसके खाते में पहुंची और इसके बदले अभ्यर्थियों को क्या आश्वासन दिया गया था।
पुलिस को कथित लेनदेन की जांच के साथ अभ्यर्थियों के बयान, बैंक ट्रांजैक्शन, मोबाइल फोन से संबंधित साक्ष्य और मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया का भी परीक्षण करना होगा, ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष तस्वीर सामने आ सके।
भर्ती व्यवस्था के लिए बड़ी परीक्षा-
होमगार्ड भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा और अन्य निर्धारित चरणों के बाद मेडिकल परीक्षण तक का सफर तय किया है। ऐसे में मेडिकल फिटनेस के नाम पर धन मांगने का आरोप केवल व्यक्तिगत शिकायत नहीं, बल्कि भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला है।
यदि किसी अभ्यर्थी को अनुचित तरीके से अनफिट करने की धमकी देकर पैसे मांगे गए हैं, तो यह गंभीर अनियमितता होगी। वहीं, आरोपों की निष्पक्ष जांच और दोष सिद्ध होने पर कानूनी कार्रवाई के साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो।
अब निगाहें पुलिस की जांच पर टिकी हैं। क्या कथित वसूली का पूरा नेटवर्क सामने आएगा? क्या मेडिकल परीक्षण में किसी तरह की अनियमितता हुई थी? और क्या प्रभावित अभ्यर्थियों को निष्पक्ष दोबारा जांच का अवसर मिलेगा? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
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