भामाशाह महादानी सियाराम  के लोकवाशी होने से एक युग का अंत हो गया-रोशनलाल उमरवैश्य

भामाशाह महादानी समाजसेवी सियाराम उमरवैश्य के निधन से पूरा जिला में शोक में डूब गया। निधन की खबर सुनने के बाद उनके आवास पर शोक जताने वालों का तांता लगा रहा।

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स्वतंत्र प्रभात संवाददाता 
 
 प्रतापगढ़।
 
भामाशाह महादानी समाजसेवी सियाराम उमरवैश्य के निधन से पूरा जिला में शोक में डूब गया। निधन की खबर सुनने के बाद उनके आवास पर शोक जताने वालों का तांता लगा रहा। जिले के जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारीगणों ने पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित कर शोक व्यक्त किया और उनको गॉड ऑफ ऑनर सलामी दी गई। 
 
समाजसेवी रोशनलाल उमरवैश्य ने कहा कि चाचा सियाराम उमरवैश्य ने अपना जीवन सर्व समाज के लिए न्योछावर कर दिया था। सियाराम उमरवैश्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व जिला संघचालक भी रहे हैं।महादानी सियाराम उमरवैश्य  ने प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर बने यह सपना देखा था और कोर्ट का फैसला आने के पहले ही अपने जीवन की कमाई को प्रभु राम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए एक करोड़ का दान देकर जिले में प्रथम दानी बन गए थे। उनके निधन से जनपद के हर वर्ग के लोग दु:खी हैं।
 
रोशनलाल ने कहा कि उनके निधन से एक युग का अंत हो गया। सियाराम जी 78 वर्ष के थे।2018 में अपनी जमीन बेंचकर व रिश्तेदारों 15 रिश्तेदारों से उधार लेकर एक करोड़ रुपए राम मंदिर को कोर्ट का फैसला आने के पहले दान दिए थे।
 
12 वर्ष की उम्र से आरएसएस शाखा से जुड़े थे। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में अयोध्या से बुलाये गए थे। आपातकाल के दौरान उन्हें जेल जाना पड़ा था। जोगापुर में सीताराम धाम बनवाये थे। गरीब परिवार की बच्चियों की शादी करवाते थे। प्रयागराज या अन्यत्र से अयोध्या जाने वाले श्रद्धालुओं को बीच रास्ते में रुकने पर सभी को निःशुल्क सुविधा देते थे। वह अपने पीछे पत्नी,4 बेटे एवं 2 बेटियां छोड़ गए हैं।
 
 
उनके निधन पर शोक व्यक्त करने वालों में गुलाब चंद्र, मदनलाल, जवाहरलाल, राधेश्याम, श्री राम, देवेंद्र गुप्ता, सुरेश अग्रवाल, छेदीलाल, संतोष कुमार, देवानंद, लक्ष्मी नारायण, राम अजोर, राजेंद्र कुमार, बालमुकुंद, अजय कुमार, संजय खंडेलवाल, भारत लाल, दिनेश सिंह दिन्नू, विपिन गुप्ता, श्याम शंकर सिंह, लखन लाल बाबा,डा0 श्याम, विश्वनाथ आदि सैकड़ो की संख्या में सर्व समाज के लोगों ने शोक जताते हुए ईश्वर से प्रार्थना की प्रभु अपने श्री चरणों में स्थान दें। इस दु:ख की घड़ी में परिवार को सहनशक्ति प्रदान करें।

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