कल तक जहां पर्याप्त भूसा-दाना नहीं था, आज पहुंचा हरा गन्ना,रमना तौफीक गौ संरक्षण केंद्र की बदली तस्वीर, लेकिन बदहाली बरकरार

मृत गौवंशों की जिम्मेदारी तय करने, बीमार पशुओं के तत्काल उपचार और नोडल अधिकारी की जवाबदेही तय करने की मांग

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हर्रैया, बस्ती। वृहद गौ संरक्षण केंद्र रमना तौफीक में लगातार गौवंशों की मौत और उपचार एवं पोषण व्यवस्था को लेकर आवाज उठा रहे भाजपा नेता एवं समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय ‘सुदामाजी’ ने कहा कि उनके लगातार निरीक्षण और सवाल उठाने के बाद अब गौशाला में भूसा-दाना तथा हरा चारा पहुंचना निश्चित रूप से व्यवस्था में हुए सुधार का संकेत है, लेकिन इससे मूल सवाल खत्म नहीं होते।
 
श्री पाण्डेय ने कहा कि “कल तक जिस गौशाला में पर्याप्त भूसा-दाना उपलब्ध नहीं था, वहां आज हरा चारा और अन्य सामग्री पहुंच रही है। कोई बहाना नहीं, व्यवस्था चाहिए। लेकिन गौ संरक्षण केंद्र की समग्र स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है और जिले के आला अधिकारियों द्वारा अब तक मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण न किया जाना गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।”
 
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गौवंश संरक्षण के लिए गौ संरक्षण केंद्रों की स्थापना के साथ चारा-दाना, देखरेख एवं उपचार के लिए बजट उपलब्ध कराया जाता है। इसके बावजूद यदि स्थानीय स्तर पर निगरानी और क्रियान्वयन में कमी रह जाती है तो योजनाओं का अपेक्षित लाभ गौवंशों तक नहीं पहुंच पाता। उन्होंने कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होने पर नियमानुसार जवाबदेही तय होनी चाहिए।
 
श्री पाण्डेय ने कहा कि उन्हें कई बार सार्वजनिक रूप से नकारात्मक टिप्पणियों और हतोत्साहित करने वाले रवैये का सामना करना पड़ता है, लेकिन साथियों और मीडिया के सहयोग से जनहित के मुद्दों को उठाने का उत्साह बना रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि गौवंशों के लिए उपलब्ध सरकारी व्यवस्था को धरातल पर प्रभावी बनाना है।
 
उन्होंने प्रशासन से सीधे सवाल किया—
 
“अब तक पोषण एवं उपचार के अभाव में जिन गौवंशों की मृत्यु हुई, उनकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा? बीमार और मरणासन्न गौवंशों का समुचित उपचार कब होगा? जिले के आला अधिकारी मौके का निरीक्षण कब करेंगे? और यदि जांच में लापरवाही प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई कब होगी?”
 
श्री पाण्डेय ने मांग की कि जिला प्रशासन तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों की टीम भेजकर गौ संरक्षण केंद्र का भौतिक निरीक्षण, उपलब्ध चारा-दाना का सत्यापन, मृत एवं बीमार गौवंशों का अभिलेख परीक्षण, उपचार व्यवस्था की जांच तथा पिछले दिनों हुई मौतों के कारणों की रिपोर्ट तैयार कराए।
 
उन्होंने कहा कि “सरकार की योजनाओं को दोष देने से पहले स्थानीय स्तर पर उनकी निगरानी और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी तय करनी होगी। जहां व्यवस्था में कमी है, वहां आवाज उठाना ही जनहित का दायित्व है।”
 
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि मामले को केवल चारा-दाना पहुंचाने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि गौ संरक्षण केंद्र की स्थायी व्यवस्था, नियमित पशु चिकित्सा, पर्याप्त पोषण, स्वच्छता और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी गौवंश की मौत लापरवाही या उपचार के अभाव में न हो।
 
 

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