गौर के हालुआ में रसूखदार प्रधान के आगे नतमस्तक हुआ ब्लॉक प्रशासन

जिले केगौरजिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे खुलेआम भ्रष्टाचार का खेल चलने के आरोपों ने गौर विकासखंड की ग्राम पंचायत हालुआ में कराए जा रहे पवन के खेत से बचाए सरहद तक चकबंद निर्माण कार्य (44 लेबर) को सवालों के घेरे में ला दिया है।

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बस्ती। जिले केगौरजिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे खुलेआम भ्रष्टाचार का खेल चलने के आरोपों ने गौर विकासखंड की ग्राम पंचायत हालुआ में कराए जा रहे पवन के खेत से बचाए सरहद तक चकबंद निर्माण कार्य (44 लेबर) को सवालों के घेरे में ला दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि धरातल पर कार्य की स्थिति और सरकारी अभिलेखों में दर्ज विवरण में भारी अंतर है। 
 
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कागजों पर करीब 44 मजदूरों की हाजिरी दर्ज कर सरकारी धन का भुगतान कराने का खेल चल रहा है, जबकि मौके पर उतनी संख्या में मजदूर कार्य करते दिखाई नहीं देते। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।
 
ग्रामीणों का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हालुआ पंचायत में खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है। उनका आरोप है कि यदि मस्टरोल और कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति का मिलान कराया जाए तो कई अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
 
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि गरीब मजदूरों के हक की मजदूरी में गड़बड़ी की जा रही है और जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं 
 
                                                          हालुआ पंचायत के मस्टरोल की जांच बनी चुनौती
 
 
ग्रामीणों के अनुसार, पवन के खेत से बचाए सरहद तक चकबंद निर्माण कार्य (44 लेबर) के मस्टरोल की जांच कर वास्तविक मजदूरों की उपस्थिति का सत्यापन कराया जाना आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान किया जाए तो स्थिति साफ हो सकती है।
 
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि धरातल पर अपेक्षित गति से कार्य नहीं हो रहा, जबकि मस्टरोल में प्रतिदिन हाजिरी दर्ज की जा रही है। इसको लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है और उन्होंने उच्चाधिकारियों से जांच की मांग की है। विकास के नाम पर मिलने वाली सरकारी निधि के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो जनता का भरोसा व्यवस्था से उठ सकता है।
 
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गौर के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) इस मामले में निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई सामने लाते हैं या फिर हालुआ पंचायत में उठ रहे सवालों का जवाब लंबे समय तक लंबित रहता है। ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं

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