मलिहाबाद में दारोगा प्रकाश व सिपाही आशीष मलिक ने बैरिकेडिंग लगाकर रोकी तिरंगा यात्रा
........स्वतंत्र प्रभात के पत्रकार एवं मलिहाबाद के प्रसिद्ध यूट्यूबर राहुल मलिहाबादी से अभद्रता, पत्रकार रितिक से गाली-गलौज का आरोप
मलिहाबाद, लखनऊ। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पत्रकारों द्वारा आयोजित तिरंगा यात्रा को रोकने और पत्रकारों व महिलाओं के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किए जाने का मामला सामने आया है। पत्रकारों ने मलिहाबाद प्रशासन के पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। आरोप है कि तिरंगा यात्रा के दौरान दारोगा श्री प्रकाश और सिपाही आशीष मलिक ने यात्रा को रोकने के साथ पत्रकारों से गाली-गलौज और महिलाओं से अभद्रता की।
बताया गया कि 15 अगस्त को सुबह करीब 11 बजे ग्राम शेरावा से पत्रकारों द्वारा तिरंगा यात्रा निकाली गई थी। यात्रा में पत्रकारों के साथ बड़ी संख्या में लोग और महिलाएं भी शामिल थीं। तिरंगा यात्रा जब मलिहाबाद चौराहे पर पहुंची तो वहां मौजूद दारोगा श्री प्रकाश ने यात्रा को कस्बे के अंदर जाने से रोक दिया।

इसी दौरान स्वतंत्र प्रभात के पत्रकार एवं मलिहाबाद के चर्चित यूट्यूबर राहुल मलिहाबादी ने कथित तौर पर दारोगा से सवाल किया कि आखिर तिरंगा यात्रा को कस्बे के अंदर से जाने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है। आरोप है कि सवाल पूछे जाने पर दारोगा श्री प्रकाश भड़क गए और राहुल मलिहाबादी के साथ कथित रूप से अपशब्दों का इस्तेमाल करने लगे।
बताया जा रहा है कि इसके बाद तिरंगा यात्रा आगे बढ़ी, लेकिन मलिहाबाद थाने से करीब 100 मीटर पहले सिपाही आशीष मलिक ने बैरिकेडिंग लगाकर यात्रा को दोबारा रोक दिया। इससे मौके पर मौजूद लोगों और पत्रकारों में नाराजगी बढ़ गई।

पत्रकारों का आरोप है कि इसी दौरान दारोगा श्री प्रकाश और सिपाही आशीष मलिक ने पत्रकार रितिक के साथ भी गाली-गलौज की और कथित तौर पर धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल किया। आरोप है कि दारोगा द्वारा पत्रकार से कहा गया कि उसकी "सारी नेतागिरी निकाल दी जाएगी।"
महिलाओं से भी अभद्रता का आरोप
मामले को लेकर पत्रकारों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि तिरंगा यात्रा में शामिल महिलाओं के साथ पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया। इससे मौके पर मौजूद लोगों में आक्रोश फैल गया। काफी देर तक यात्रा को रोके जाने के बाद जब लोगों ने विरोध किया तो आखिरकार तिरंगा यात्रा को आगे जाने दिया गया।
स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा यात्रा रोकने पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पत्रकारों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर निकाली जा रही तिरंगा यात्रा के लिए यदि कोई प्रशासनिक या यातायात संबंधी प्रतिबंध था तो पुलिस अधिकारियों को आयोजकों को पहले से इसकी जानकारी देनी चाहिए थी। लेकिन कथित तौर पर जिस तरीके से यात्रा को रोका गया और पत्रकारों के साथ व्यवहार किया गया, उससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पत्रकारों का कहना है कि क्या स्वतंत्रता दिवस के दिन शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा यात्रा निकालना भी अपराध हो गया है? यदि यात्रा के रूट को लेकर प्रशासन को कोई आपत्ति थी तो उसे बातचीत के माध्यम से सुलझाया जा सकता था।
कार्रवाई की मांग, नहीं तो धरने की चेतावनी
मामले के बाद पत्रकारों में नाराजगी है। पत्रकारों ने संबंधित पुलिसकर्मियों के व्यवहार की जांच कराकर दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है। पत्रकारों का कहना है कि यदि मामले में निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
अब सवाल यह है कि स्वतंत्रता दिवस के दिन तिरंगा यात्रा को रोकने और पत्रकारों व महिलाओं के साथ कथित अभद्रता के इन आरोपों पर मलिहाबाद प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी? क्या आरोप सही पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी महज आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाएगा? वहीं मलिहाबाद थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह भाटी के द्वारा दो दिन का समय मांगा गया और जांच कर कार्यवाही करने का आश्वासन दिया गया,फिलहाल पत्रकारों की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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