बभनान मंडी में बदहाल शौचालय: दरवाजे गायब, गंदगी के बीच रखी पानी की टंकी, जिम्मेदार मौन

स्वच्छता के दावे फेल! बभनान मंडी में शौचालय बने मुसीबत, जिम्मेदार बेखबर

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बस्ती। बस्ती जिले केनगर पंचायत बभनान की नवीन सब्जी मंडी में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली अब एक गंभीर जनसमस्या का रूप लेती जा रही है। लाखों रुपये की लागत से विकसित की गई इस मंडी में जहां रोजाना सैकड़ों व्यापारी और ग्राहक पहुंचते हैं, वहीं मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव प्रशासनिक दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। खासकर मंडी परिसर में बने शौचालयों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोग उनका उपयोग करने से कतराने लगे हैं। मौके पर निरीक्षण के दौरान जो स्थिति सामने आई, वह बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है। शौचालयों के भीतर और बाहर चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। फर्श पर गंदा पानी भरा है, जिससे न केवल दुर्गंध फैल रही है बल्कि फिसलकर चोट लगने का खतरा भी बना हुआ है।
 
जगह-जगह कूड़ा-करकट पड़ा हुआ है, जो लंबे समय से साफ-सफाई न होने का स्पष्ट संकेत देता है। शौचालयों की दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है, छत से सीलन टपक रही है और समुचित रखरखाव के अभाव में पूरी संरचना जर्जर होती जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन शौचालयों में अब तक दरवाजे तक नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में महिलाएं, बुजुर्ग और अन्य उपयोगकर्ता बेहद असहज और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि सामाजिक गरिमा और निजता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। वहीं, शौचालय परिसर में रखी पानी की टंकी भी गंदगी के बीच पड़ी हुई है।
 
इस टंकी से इस्तेमाल होने वाले पानी की स्वच्छता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे अस्वच्छ वातावरण में रखा पानी संक्रमण और बीमारियों का कारण बन सकता है। यह सीधे तौर पर आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। व्यापारियों ने बताया कि मंडी में प्रतिदिन सैकड़ों लोग आते हैं, लेकिन यहां शौचालय, और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। कई बार नगर पंचायत के अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला, जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी।
 
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत केवल कागजों में सफाई अभियान चलाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेती है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जल्द ही शौचालयों की मरम्मत, सफाई और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की गई तो वे आंदोलन और विरोध प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे। मंडी जैसे सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की अव्यवस्था न केवल नगर पंचायत की कार्यशैली पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आम जनता की बुनियादी जरूरतों को किस तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।
 
स्वच्छ भारत अभियान जैसे बड़े दावों के बीच इस तरह की तस्वीरें सरकारी दावों की सच्चाई उजागर करती हैं। इस संबंध में जब अधिशासी अधिकारी (ईओ) कीर्ति सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं, सीआरओ कीर्ति प्रकाश भारती ने बताया कि मामले की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। अब देखना यह होगा कि नगर पंचायत प्रशासन इस गंभीर समस्या को लेकर कब तक उदासीन बना रहता है और कब तक आम जनता को इस बदहाल व्यवस्था के बीच अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ेंगी।

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