ग्रामीण भारत की शिक्षा और स्वास्थ्य को ऊर्जा दे सकते हैं सोलर प्लांट
आज आवश्यकता केवल योजनाएं बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें धरातल पर टिकाऊ बनाने की है।
भारत वर्ष 2047 तक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया, हरित ऊर्जा और आधुनिक शिक्षा जैसे अनेक महत्वाकांक्षी अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन इन सभी योजनाओं की सफलता का आधार एक ही है निर्बाध बिजली आपूर्ति। देश के महानगरों और बड़े शहरों में बिजली की उपलब्धता अपेक्षाकृत बेहतर है, इसलिए वहां डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लोगों तक पहुँच रहा है। इसके विपरीत तहसील, कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूल, कॉलेज और अस्पताल आज भी बिजली की अनियमित आपूर्ति, कम वोल्टेज और बार-बार होने वाली तकनीकी खराबियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लैब, कंप्यूटर शिक्षा और आधुनिक चिकित्सा उपकरण केवल सरकारी योजनाओं की फाइलों तक सीमित होकर रह जाते हैं।
विडंबना यह भी है कि एक ओर सरकार सरकारी संस्थानों को हाईटेक बनाने पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर इन संस्थानों के सुचारू संचालन के लिए सबसे आवश्यक संसाधन बिजली की स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। बिना बिजली के डिजिटल शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की कल्पना अधूरी है। ऐसी स्थिति में सरकार को एक दूरदर्शी निर्णय लेते हुए देश के सभी शासकीय स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों में रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित करने की राष्ट्रीय योजना लागू करनी चाहिए। यह केवल वैकल्पिक ऊर्जा का उपाय नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को एक साथ मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम होगा।
सोलर प्लांट स्थापित होने से इन संस्थानों को दिनभर निर्बाध बिजली मिलेगी। विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना व्यवधान जारी रहेगी, स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर लैब प्रभावी ढंग से संचालित हो सकेंगी तथा अस्पतालों में जीवन रक्षक उपकरण बिजली संकट से प्रभावित नहीं होंगे। इतना ही नहीं, सरकार का हर वर्ष बिजली बिलों पर होने वाला करोड़ों रुपये का व्यय भी काफी हद तक कम हो जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा। आज आवश्यकता केवल योजनाएं बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें धरातल पर टिकाऊ बनाने की है।
यदि सरकार वास्तव में विकसित भारत का सपना साकार करना चाहती है, तो ग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना होगा। शासकीय स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों में सोलर प्लांट लगाने की पहल इसी दिशा में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध हो सकती है। विकसित भारत की मजबूत नींव तभी रखी जाएगी, जब गांव का विद्यालय और अस्पताल भी शहरों की तरह रोशन, आधुनिक और ऊर्जा संपन्न होंगे।
अरविंद रावल


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