बिराहिमपुर ग्राम पंचायत की त्रिनेत्र योजना में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
शिकायतों और खबर प्रकाशित होने के बाद भी कार्रवाई नहीं
मलिहाबाद, लखनऊ। मलिहाबाद विकासखंड की ग्राम पंचायत बिराहिमपुर के मजरा रामपुर बस्ती में सरकार की महत्वाकांक्षी त्रिनेत्र योजना को लेकर गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि तत्कालीन ग्राम प्रधान राम शंकर कश्यप ने ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता करते हुए सरकारी धन का दुरुपयोग किया। वहीं ग्राम पंचायत सचिव पर भी इस योजना में प्रधान के साथ मिलीभगत कर सरकारी धन हड़पने का आरोप है| ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की गई और समाचार भी प्रकाशित हुआ, लेकिन आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

ग्रामीणों के अनुसार, त्रिनेत्र योजना के तहत गांव में 16 CCTV कैमरे लगाए गए। आरोप है कि इन कैमरों की खरीद और स्थापना के नाम पर करीब 2 लाख रुपये का भुगतान दिखाया गया, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि बाजार में इन कैमरों की वास्तविक कीमत लगभग 35 से 40 हजार रुपये के बीच है। ऐसे में ग्रामीणों ने सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
महिलाओं की निजता पर सबसे बड़ा सवाल
ग्रामीणों का सबसे गंभीर आरोप यह है कि CCTV कैमरों का उपयोग गांव की सुरक्षा के बजाय महिलाओं और युवतियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रतिदिन रात के समय प्रधान के कुछ करीबी लोग CCTV की रिकॉर्डिंग देखते हैं, जबकि ऐसा कार्य केवल अधिकृत सरकारी अधिकारियों द्वारा ही किया जाना चाहिए। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह महिलाओं की निजता, सम्मान और उनके मौलिक अधिकारों से जुड़ा अत्यंत गंभीर मामला होगा।
ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मामले की शिकायत संबंधित विभाग के अधिकारियों से कई बार की गई और खबरें भी प्रकाशित हुईं, लेकिन आज तक किसी भी स्तर पर जांच शुरू नहीं की गई। उनका आरोप है कि ग्राम प्रधान का कार्यकाल समाप्त हो जाने के कारण अधिकारी अब कार्रवाई से बच रहे हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से सवाल किया है कि क्या किसी ग्राम प्रधान, नेता या जनप्रतिनिधि का कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद उसके कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार की जांच नहीं होगी? क्या सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप केवल समय बीत जाने से समाप्त हो जाते हैं, या फिर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी?
ग्रामीणों ने मांग की है कि त्रिनेत्र योजना के पूरे खर्च का तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराया जाए, CCTV कैमरों की खरीद से जुड़े सभी अभिलेखों की जांच की जाए, रिकॉर्डिंग तक किस-किस की पहुंच रही इसकी भी जांच हो और यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। अब पूरा मामला प्रशासन की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई पर टिका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस मामले में भी कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकार की योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।
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