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राम मंदिर चढ़ावा चोरी - आस्था पर लगा दाग और सवालों के घेरे में सिस्टम
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी ने सिर्फ पैसे की हेराफेरी का मामला नहीं है, ये करोड़ों लोगों की आस्था पर सीधा हमला है।
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी ने सिर्फ पैसे की हेराफेरी का मामला नहीं है, ये करोड़ों लोगों की आस्था पर सीधा हमला है। 25 जून 2026 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 8 लोगों के खिलाफ पहली FIR दर्ज कराई है। सभी आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। बहुत बड़ी विडंबना है कि जो मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है इन चोरों ने उसे भी नहीं छोड़ा। राम मंदिर आंदोलन के बाद से अब तक पूरे देश के हिंदुओं की आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है। लेकिन FIR के बाद भी सवाल खत्म नहीं हुए। बल्कि नए सवाल खड़े हो गए हैं। क्या हुआ था?
सीसीटीवी में साफ दिखा कि मंदिर के दानपात्रों से निकली नकदी की गिनती करने वाले कर्मचारी ही चोरी कर रहे थे।
आरोपियों में रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और करुणेश पांडे शामिल हैं। इनमें से छह कैशियर हैं। सुभाष श्रीवास्तव काउंटिंग इंचार्ज था। टिन्नू यादव का काम कैश की गिनती सुपरवाइज़ करके बैंक तक ले जाना था। यानी जिन पर भरोसा था, वही बेईमान निकले। एसआईटी की जांच में खुलासा हुआ कि 14,500 रुपए महीने की नौकरी करने वाले कर्मचारियों ने 5 साल में करोड़ों की संपत्ति बना ली। एक ने डेढ़ करोड़ की जमीन खरीदी, दूसरे ने 40 लाख का प्लॉट लिया। शुरुआती अनुमान 200 करोड़ के घोटाले का है। एफआईआर दर्ज हुई, पर देर से क्यों? ट्रस्ट ने चोरी की जांच के लिए 13 जून को एसआईटी बनवाई। 25 जून को एफआईआर हुई। यानी 12 दिन लग गए। जागरण की रिपोर्ट बताती है कि इससे पहले भी दो कर्मचारियों को गुपचुप तरीके से पकड़ा गया था। बिना एफआईआर के ही रिकवरी की जा रही थी। पुलिस ट्रस्ट के साथ मिलकर पूछताछ कर रही थी।
सवाल ये है: जब चोरी का शक था तो तुरंत पुलिस को क्यों नहीं बताया गया? क्या ट्रस्ट पहले अपने स्तर पर मामला दबाना चाहता था? बड़े नाम गायब क्यों हैं? एफआईआर में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम नहीं है। लेकिन उनका ड्राइवर टिन्नू यादव आरोपी है। विपक्ष का आरोप है कि छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई करके बड़े लोगों को बचाया जा रहा है। बीएनएस की धारा 306, 316(5), 317(4), 317(5) और 61 के तहत केस दर्ज हुआ है। इनमें उम्रकैद तक की सजा है। अगर टिन्नू यादव चोरी कर रहा था तो क्या चंपत राय को पता नहीं चला? या उन्होंने आंखें बंद कर लीं? एसआईटी की दूसरी रिपोर्ट आने तक ये सवाल बना रहेगा। सिस्टम में खामी कहां थी? मंदिर के चढ़ावे की गिनती तीन स्तर पर होती है: 24 प्राइवेट कर्मचारी नोट गिनते हैं। 12 ट्रस्ट कर्मचारी निगरानी करते हैं। 14 SBI और TCS के ऑडिटर होते हैं। इतनी लेयर के बावजूद चोरी हो गई। जांच में सामने आया कि एक पदाधिकारी ने कैमरे लगाने का विरोध किया था। यानी सिस्टम में पारदर्शिता की कमी थी। CCTV थे, पर निगरानी नहीं थी। ऑडिट था, पर भरोसा अंधा था। आगे क्या होना चाहिए? पहला, एसआईटी की जांच सिर्फ 8 आरोपियों तक सीमित न रहे। पूरी चेन की जांच हो। किसके इशारे पर चोरी हुई, पैसा कहां गया, ये साफ होना चाहिए। CM योगी ने कहा है कि "दूध का दूध, पानी का पानी" होगा। जनता यही उम्मीद कर रही है।
दूसरा, ट्रस्ट को अपनी वित्तीय व्यवस्था सार्वजनिक करनी होगी। हर महीने कितना चढ़ावा आया, कहां खर्च हुआ, इसका डिजिटल डिस्प्ले मंदिर परिसर में लगे। तिरुपति बालाजी मंदिर की तरह रियल टाइम अपडेट सिस्टम बने। तीसरा, कैश हैंडलिंग खत्म हो। QR कोड, ऑनलाइन पेमेंट को बढ़ावा दिया जाए। जितना कैश कम होगा, चोरी की गुंजाइश उतनी कम होगी। चौथा, ट्रस्ट में सरकारी प्रतिनिधि बढ़ाए जाएं। अभी सिर्फ एक आईएएस अधिकारी है। CAG से सालाना ऑडिट अनिवार्य हो। राम मंदिर सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है। ये 500 साल के संघर्ष के बाद मिली आस्था की जीत है। 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के दिन जो भाव देश ने देखा, वो अनमोल है। अगर चंद लोग उस आस्था को कैश कराने लगेंगे तो मंदिर का मतलब खत्म हो जाएगा।
FIR पहली कार्रवाई है, आखिरी नहीं। असली इम्तहान अब शुरू हुआ है - क्या ट्रस्ट दोषियों को सजा दिला पाएगा, चाहे वो कितना भी बड़ा हो? क्या व्यवस्था बदलेगी ताकि फिर कोई टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा आस्था का सौदा न कर सके?
जनता देख रही है। राम देख रहे हैं। लोग तरह तरह के सवाल उठा रहे हैं और लोगों के सवाल तब ही शांत होंगे जब इस पूरे मामले पय ठीक ढंग से पर्दा उठेगा। फिलहाल उम्मीद है कि जांच सही दिशा में हो रही है।


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